अकेलापन न केवल आपके दिल, अपितु दिनचर्या को भी प्रभावित करता है

Updated on 18 May, 2017 at 3:29 pm

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लंदन के किंग्स कालेज के शोधकर्ताओं ने 2000 से अधिक लोगों पर रिसर्च कर पाया हैं कि अकेलापन नींद न आने का प्रमुख कारण हैं। दुनिया में लगभग 24 फीसदी से अधिक लोग अकेलेपन एवं तनाव के शिकार हैं, जो अपने-आपको अन्य लोगों की अपेक्षाकृत अधिक थका महसूस करते हैं।

इस प्रकार के लोग अपने जीवन में एकाग्र नहीं रह पाते हैं।

शोधकर्ताओं के अनुसार अकेलेपन का शिकार व्यक्ति तनाव ग्रसित हो जाता हैं और अपने सामाजिक सम्बन्धों को भी पर्याप्त रूप से नहीं समझ पाता है। वह सामाजिक अवचेतना का शिकार हो जाता हैं। तनावग्रस्त व्यक्ति अपने आप को समाज से भी अलग-थलग महसूस करने लगता हैं।

समाज में रहने के बावजूद वह अकेला महसूस करता है।


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शोधकर्ताओं ने एक ही देशान्तर के दो देशों इग्लैंड तथा वेल्स में जुड़वां 18-19 आयुवर्ग के 2,232लोगों पर शोध कर पाया कि जुड़वां व्यक्ति भी अकेलेपन का शिकार हो जाते है, जब इन्हें अलग-अलग रखा जाता है। इन पर हुए शोध पर प्रभावशाली चार परिणाम आए। जब उनसे पूछा गया कि जब वे दोनों अलग-अलग हों तो कैसा महसूस होता है? कैसा लगता है जब दूसरा आप से दूर हों? जब आप दोनों को अलग किया जाता हैं तो कैसा महसूस होता है? तथा कैसा महसूस होता हैं जब आप साथ नहीं रहतें हैं?

शोधकर्ताओं ने पाया कि जुड़वां भाई से दूर होने के क्रम में व्यक्ति अधिक तनावग्रस्त, अकेला तथा शिथिल महसूस करता है।

शोधकर्त्ता लूईस एरेन्साल्ट अपने शोध में कहते हैं कि जो व्यक्ति अकेलेपन के शिकार हो जाते हैं, उनको नींद कम आने लगती है। वे नकारात्मकता का शिकार हो जाते हैं तथा इसके साथ ही लगातार अपने आपको कई चरणों में अवसाद से ग्रसित होते चले जाते हैं।

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