आसान नहीं है मुम्बई में जिन्दगी

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Updated on 11 Nov, 2017 at 9:33 am

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‘ऐ दिल है मुश्किल जीना यहां, जरा हट के जरा बच के- ये है बम्बई मेरी जां।’

बॉलीवुड की फिल्म का यह गाना भले दशकों पहले लिखा गया था, लेकिन इसके भावार्थ आजतक नहीं बदले हैं। मुम्बई के बारे में आपने अब तक सब अच्छा ही पढ़ा होगा। मुम्बई इस देश का सबसे बेहतरीन शहर है। यहां की नाईटलाईफ की हर जगह चर्चा होती है, आदि-आदि। लेकिन क्या सच में मुम्बई में जीवन जीना आसान है?

दिल में अरमानों को संजोये हजारों लोग मुम्बई अपना सपना पूरा करने के लिए आते हैं। लेकिन आम तौर पर यह इतना आसान भी नहीं होता। यहां हम बात करेंगे मुम्बई में उन तमाम कठिनाइयों की, जो आम मुम्बईकर रोजमर्रा की जिन्दगी में भुगतते हैं।

1. 90 यात्रियों के बैठने की क्षमता वाले लोकल ट्रेन के डिब्बे में जब 200 से अधिक लोग ठूंस दिए जाते हैं, तब आपको पता चलता है कि मायानगरी का सफर इतना आसान भी नहीं।

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2. मुम्बई में खड़े होने की जगह नहीं मिल पाती। बैठना और फिर सोना तो दूर की कौड़ी है। इस शहर में प्रोपर्टी की कीमत गर्मियों के दौरान तापमान की तरह बढ़ती है।

साहब, इसका यह मतलब नहीं कि सर्दियों में कीमतें कम हो जाती हैं। प्रोपर्टी की कीमतों की महिमा इतनी है कि यह सर्दियों में भी आपको पसीने छुड़ा दे।

3. बेस्ट बस का एक टिकट खरीदने के लिए आपको बड़ा पाव से भी ज्यादा पैसा खर्चा करना पड़ता है।

4. ट्रेन और बस से पीछा छुड़ाने के लिए अगर आप अपनी कार खरीद भी लेते हैं तो लूजर ही कहलाएंगे। ट्रैफिक जाम इतना कि कार चलाने का मौका बेहद कम मिलेगा।

सावधान। पीछे से लगातार बज रहे हॉर्न की वजह से आप बहरे भी हो सकते हैं।

5. मुम्बई सपनों का शहर है। लेकिन इस बात की कोई गारंटी नहीं कि यहां आपके सपने पूरे होंगे ही।

6. सड़कों की हालत इतनी खराब है कि आप बाएं से नहीं चले, बल्कि जो बचा होता है, उसी में चलते हैं।

7. हाल के दिनों में मुम्बई में दो चीजें बड़ी तेजी से बढ़ी हैं। एक तो आबादी और दूसरी प्राइवेट गाड़ियों की संख्या। जगह का क्या करें? यह नहीं बढ़ रही है, बड़े भाई।

8. मम्बई नाईट लाईफ के लिए जाना जाता है। लेकिन देर रात 2 बजे के बाद आपको समुन्दर के बीच पर जाने की इजाजत नहीं होती। आखिर क्यो?

9. हाहाहाहाहा। आपको पता भी नहीं चलेगा कि आप किस कदर सड़क पर हो रहे झगड़ा या हंगामा का हिस्सा बन जाएंगे। यह खुद-ब-खुद हो जाता है।

10. मुम्बई लोकल में सेकेन्ड क्लास की न्यूनतम टिकट 5 रुपए में मिलती है और फर्स्ट क्लास की टिकट 50 रुपए में।

कायदे से इन दोनों टिकटों में कोई अंतर नहीं होना चाहिए, क्योंकि बैठने के लिए सीट तो आपको मिलने से रही।

11. कॉरपोरेट क्लास के लिए तो मुम्बई का जीवन आसान है। आप मुम्बई में किसी से भी बात कर लें, वह यही कहेगा। है न??

आप मुम्बई में रहते हैं? इस शहर के बारे में आपकी क्या राय है। यहां जरूर लिखे।  


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