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भगवान श्रीकृष्ण के बताए इन 5 सक्‍सेस मंत्र से आप बन सकते हैं करोड़पति

Published on 4 September, 2018 at 1:29 pm By

भगवान श्रीकृष्ण के उपदेश आज भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं, जितने महाभारत के युद्ध से पूर्व अर्जुन के लिए थे। भगवान श्री कृष्ण का व्यवहारिक ज्ञान का सार आज भी उन तमाम युवाओं के प्रेरणासोत्र हैं जो इस प्रतियोगी युग में सफलता पाने की कामना रखते है।

श्रीकृष्ण द्वारा दी गयी शिक्षा सदियों से उत्कृष्ट मैनेजमेंट स्किल्स का उत्तम नमूना है, जो इस युग में किसी के लिये भी सक्सेस मंत्र से कम नही हैं। तो आइये जानते हैं क्या है श्रीकृष्ण की ये 5 सफलता के सूत्र जिसका अनुपालन कर हर युवा उद्यमी सफलता की तरफ अग्रसर हो सकता है।


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दोस्ती हो तो कृष्ण-सुदामा जैसी

कहते हैं कि दोस्ती में शर्तों के लिए कोई जगह नहीं होती, इसलिए आपको भी ऐसे ही दोस्त अपने आस-पास रखने चाहिए जो हर मुश्किल परिस्थिति में आपका संबल बनें।भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से हम यह पाठ सीख सकते हैं कि दोस्त वही अच्छे होते हैं जो कठिन से कठिन परिस्थिति में आपका साथ देते हैं। भगवान श्रीकृष्ण ने जहां अपने बचपन के मित्र सुदामा को ग़रीबी से पार लगाया, वहीं पांडवों का साथ हर मुश्किल वक्त में दिया।

 

रिस्क लेने से ना कतरायें

भगवान श्रीकृष्ण जीवन का सबसे बड़ा आकर्षण यह है कि वह किसी बंधी-बंधाई लीक पर नहीं चले। किसी भी परिस्थिति का सही आकलन और मौके की जरूरत के हिसाब से सही समायोजन आप भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से सीख सकते हैं। ठीक इसी तरह महाभारत में उन्होंने अपनी भूमिका बदली और अर्जुन के सारथी बन पांडवों को विजयी बनाया।

 

धैर्य के साथ अनुभव से सीखे सफलता के गुण

किसी भी व्यवसाय में फ़ायदा-नुकसान, उतार-चढ़ाव होते ही रहते हैं, ऐसे में धैर्य की ज़रूरत रहती है। भगवान श्रीकृष्ण गीता में कहते हैं कि हमें मुसीबत के समय या सफलता न मिलने पर हिम्मत नहीं हारनी चाहिए। इसकी बजाय हार की वजहों को जानकर आगे बढऩा चाहिए। समस्याओं का सामना कर अगर डर को पार कर लिया जाये तो सफलता निश्चित है।



 

व्यर्थ की चिंतायें भूलकर कर्म करो

इस युग में भी भगवान श्रीकृष्ण सबसे बड़े मैनेजमेंट गुरु हैं। उन्होंने अनुशासन में जीने , व्यर्थ चिंता न करने और भविष्य की बजाय वर्तमान पर ध्यान केंद्रित करने का मंत्र दिया।

 

 

श्री कृष्ण ने गीता में कर्मण्ये वाधिकारस्ते मां फलेषु कदाचन.. मां कर्मफलहेतुर्भू: मांते संङगोस्त्व कर्मणि… श्लोक के द्वारा मनुष्य को यह शिक्षा दी है कि व्यर्थ की चिंताएं भूलकर सिर्फ अपने कर्म पर ध्यान देना चाहिए।

योजनाबद्ध तरीके से पूरा करें कार्य

 

 


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कोई भी कार्य अगर उचित योजनाबद्ध तरीके से किया जाए तो निश्चित ही सफलता हासिल होती है। कौरवों की विशाल सेना के आगे अगर पांडवों के पास भगवान श्रीकृष्ण की कूटनीति न होती तो उनका युद्ध में जीतना असंभव था। किसी भी छोटे या बड़े कार्य करने से पहले अगर आपके पास उचित प्लान है तो आप सफलता का स्वाद ज़रूर चखेंगे।

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