16वीं सदी में बने इस मंदिर के खंभे विचित्र और रहस्यमयी हैं

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5:00 pm 1 Sep, 2016

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आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले का लेपाक्षी मंदिर अपने हवा मे झूलते हुए खंभे की वजह से दुनिया भर में मशहूर है।

16वीं सदी में बने इस मंदिर के एक स्तम्भ का रहस्य अब तक नहीं सुलझाया जा सका है। इस नक्काशीदार खंभे की खासियत यह है कि इसका नीचे वाला सिरा जमीन को नहीं छूता। खास बात यह है कि यहं आने वाले श्रद्धालु अपनी मन्नत पूरी करने के लिए खंभे के नीचे से कपड़ा सडका पार ले जाते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने वालों की मुराद पूरी होती है।

बताया जाता है कि अंग्रेजों के राज में एक इन्जीनियर ने इस खंभे का रहस्योद्घाटन करने के लिए इस मंदिर के एक सिरे को तोड़ने का प्रयास किया था। ऐसा करने पर पाया गया कि मंदिर के सभी खंभे दरअसल हवा में झूलते हैं।


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पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक इस मंदिर का निर्माण ऋषि अगस्त्य ने करवाया था। वहीं, इतिहासकारों की मानें तो इसे वर्ष 1583 में विजयनगर के राजा के लिए काम करने वाले दो भाईयों (विरुपन्ना और वीरन्ना) ने बनाया था।

विजयनगर शैली का यह मन्दिर नागलिंग प्रतिमा की वजह से भी विख्यात है। यह प्रतिमा एक ही पत्थर से बनी है और भारत में सबसे बड़ी नागलिंग प्रतिमा मानी जाती है।

यहां भगवान शिव, भगवान विष्णु और भगवान वीरभद्र के अलग-अलग मंदिर मौजूद हैं।

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