बर्थडे स्पेशल- एक्टर बनना चाहते थे सुरीली आवाज़ के जादूगर मुकेश

Updated on 22 Jul, 2017 at 3:56 pm

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अपनी जादुई आवाज़ से लाखों दिलों पर राज करने वाले गायक मुकेश भले ही आज इस दुनिया में नहीं है, लेकिन उनकी सुरीली आवाज़ और बेहतरीन नगमें उनके चाहने वालों के जेहन में अब भी ताज़ा है। 22 जुलाई, 1923 को दिल्ली में जन्में मुकेश के सुरीले नगमों के आगे आज के गाने कहीं नहीं ठहरते। बात रोमांटिक गाने की हो या सैड सॉन्ग की, उनकी आवाज़ हर तरह के गाने को बेहतरीन बनाने का मादा रखती थी।

बीमार लड़की के लिए गाने पहुंच गए थे मुकेश

50 के दशक में मुकेश की आवाज की आवाज़ का जादू संगीत प्रमियों के सिर चढ़ बोल रहा था। वैसे मुकेश, जिनका पूरा नाम मुकेश चंद माथुर था, अच्छे सिंगर होने के साथ ही अच्छे इंसान भी थे। एक वाकया ऐसा हुआ जिससे पता चलता है मुकेश बेहद संवेदनशील इंसान थे। कहा जाता है कि एक बार एक लड़की बीमार हो गई और अपनी मां से बोली कि अगर मुकेश आकर उसे अपना गाना सुनाएं तो वह ठीक हो सकती है। किसी तरह जब ये बात मुकेश तक पहुंची, तो वो तुरंत उस लड़की से मिलने पहुंच गए और उसके लिए गाया भी।

यादगार नगमें

‘दोस्त-दोस्त न रहा’, ‘जीना यहां मरना यहां’, ‘कहता है जोकर’, ‘दुनिया बनाने वाले क्या तेरे मन में समाई’, ‘आवारा हूं’, ‘मेरा जूता है जापानी’ जैसे खूबसूरत नगमों के सरताज मुकेश की आवाज ने न सिर्फ़ भारत बल्कि पूरी दुनिया को अपना दीवाना बना दिया।

गाने के साथ था हीरो बनने का शौक


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मुकेश अपने 10 भाई-बहनों में छठे नंबर पर थे। दोस्तों के बीच मुकेश कुंदन लालसहगल के गीत सुनाया करते थे और अपनी आवाज का जादू उन्होंने सब पर चला रखा था। दसवीं तक पढ़ाई करने के बाद उन्होंने पीडब्लूडी में नौकरी शुरू की थी, लेकिन उनकी ख्वाहिश थी कि वह हिंदी फिल्मों में बतौर हीरो काम करें। अपने इस शौक को पूरा करने के लिए कुछ साल बाद उन्होंने मायानगरी का रुख किया।

फिल्मी सफर

मुकेश ने अपना फिल्मी सफर 1941 में शुरू किया। फिल्म ‘निर्दोष’ में मुकेश ने एक्टिंग के साथ-साथ गाने भी खुद गाए। इसके अलावा, उन्होंने ‘माशूका’, ‘आह’, ‘अनुराग’ और ‘दुल्हन’ में भी बतौर एक्टर काम किया। उन्होंने अपने करियर में सबसे पहला गाना ‘दिल ही बुझा हुआ हो तो’ गाया था। शुरुआत में उन्हें फिल्म जगत में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। वैसे एक्टिंग में तो वो कुछ खास नहीं कर पाए, मगर बतौर सिंगर उनकी गिनती सबसे सफल गायकों में होती है। अपने दौर में वह लगभग हर सुपरस्टार की आवाज़ बने।

गायिकी की दुनिया का ये सितारा 27 अगस्त 1976 को दुनिया को अलविदा कह गया, हैरानी की बात तो ये है कि जिस वक्त उन्हें हार्ट अटैक आया वो स्टेज शो के दौरान ‘एक दिन बिक जाएगा माटी के मोल, जग में रह जाएंगे प्यारे तेरे बोल’ गाना गा रहे थे। सचमुच उनके बोल आज भी संगीत प्रेमियों के दिलों में ताज़ा हैं।

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