ये हैं वो 5 कारण जो धरती के कभी भी ख़त्म होने की ओर इशारा करते हैं !

Updated on 2 Jan, 2018 at 12:11 pm

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इस दुनिया में जो भी सजीव चीज़ें हैं एक न एक दिन उनका खत्म होना तय है। जो आया है उसे एक दिन जाना ही होगा यही सच्चाई है। वैसे सजीव चीज़ें ही नहीं, बल्कि हमारा ब्रह्मांड भी एक दिन समाप्त हो सकता है और जिस पृथ्वी को हम अपना घर मानते हैं, शायद एक दिन उसका भी अस्तित्व समाप्त हो जाए। भविष्य में क्या होगा ये तो किसी को पता नहीं है, लेकिन कल्पना तो कर ही सकते हैं। उसी कल्पना के आधार पर कुछ ऐसे कारण सामने आए हैं, जो बताते हैं कि आज दुनिया का आखिरी दिन हो सकता है।

 

 

1. ब्रह्मांड गलत वैक्यूम में है और ये कभी भी सही वैक्यूम में जा सकता है।

 

इस थ्योरी के मुताबिक, हमारा ब्रह्मांड जैसा कि हम जानते हैं स्थिर स्थिति में हो सकता है या नहीं भी हो सकता है। उदाहरण के लिए एक पाए वाले टेबल पर कुछ बॉल रखे हुए हैं, तो बॉल को भले लगे कि वो बिल्कुल निचली सतह पर हैं और गिरेंगी नहीं, लेकिन हमें पता है कि टेबल के हिलते ही बॉल जमीन पर गिर जाएंगे। जब एक बॉल को धकेला जाता है तो पोटेंशियल एनर्जी काइनेटिक एनर्जी में बदल जाती है, जो बॉल को जमीन की तरफ भेजती है, जिससे बॉल ऊपर से नीचे की तरफ गिरती है।

इसी तरह यदि हमारा ब्रह्मांड भी गलत वैक्यूम में है और नीचे कोई स्थिर सतह मौजूद है, जो किसी कारण से यदि टूटती है तो ऊर्जा का विस्फोट होगा और ब्रह्मांड अपने गलत वैक्यूम से लाइट की स्पीड से असल वैक्यूम की तरफ जाएगा और इस तरह सबकुछ खत्म हो जाएगा।

हो सकता है कि ऐसा पहले हुआ हो, या कभी न हुआ हो या फिर अभी हो रहा हो, हमें इसका पता इसलिए नहीं चलता, क्योंकि अंतरिक्ष बहुत बड़ा है। हो सकता है जब हमें इस बदलाव का एहसास होगा तब कुछ ही पल में सब खत्म हो जाए।

 

 

2. हो सकता है ब्रह्मांड एलियन सिमुलेनशन में हो और कोई भी कभी भी रिसेट बटन दबा दे।

 

यदि सिमुलेशन की परिकल्पना पर यकीन करे तो पूरा ब्रह्मांड एक कंप्यूटर सिमुलेशन या प्रोग्रामिंग की तरह है और हम जो भी देखते हैं वो बस कोड है। समय के साथ कंप्यूटर जिस तरह एडवांस होता जा रहा है. इस परिकल्पना से इनकार नहीं किया जा सकता कि भविष्य में ब्रह्मांड की प्रोग्रामिंग अगर कोई रिसेट कर दे तो सब समाप्त हो जाएगा।

धरती पर मानव जीवन के लिए ज़रूरी सारी चीज़ें मौजूद हैं। ये सिर्फ कोई इतेफाक तो हो नहीं सकता। ऐसा ज़रूर पूरी प्लानिंग के साथ हुआ है। सिमुलेशन का एक और सबूत यह है कि ब्रह्मांड की सभी घटनाएं और फिजिक्स मैथेमैटिकल फॉर्मूला में रिप्रेज़ेंट किए जाते हैं। ज़रा सोचिए ब्रह्मांड का कोडर यदि किसी दिन रेड बटन दबाकर सबकुछ टर्मिनेट यानी पूरा प्रोग्राम खत्म कर दे, तो क्या होगा। ऐसा वो बोर होकर या कंप्यूटर की मेमरी फुल होने की वजह से कर सकता है। हो सकता है ऐसा हज़ारों साल बाद हो या फिर आज ही हो जाए।

 

 

3. पूरी दुनिया मेरे या आपके अनुमान के मुताबिक हो सकती है, लेकिन दोनों में से एक ही सही होगा।


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इस दार्शनिक थ्योरी के मुताबिक, मैं जो कुछ देख और अनुभव कर रहा हूं, वो सिर्फ मेरा भ्रम हैं और असल में कुछ मौजूद नहीं है। मैं जिन लोगों को देख रहा हूं वो मेरे दिमाग का अनुमान है और जिस दिन मेरा दिमाग काम करना बंद करेगा, इन सबका अस्तित्व समाप्त हो जाएगा।

सोलिस्पिस के अनुसार, मेरा दिमाग ही सिर्फ़ वास्तविकता है और बाकी सभी मेरी सोच का प्रतिनिधित्व करते हैं, उनका कोई अपना अस्तित्व नहीं है।

एक तर्क हो सकता है कि अगर मेरा जन्म 1990 में हुआ और मेरे साथ ही सब कुछ अस्तित्व में आया, तो एक इतिहास क्यों है? पांच मिनट की परिकल्पना कुछ हद तक इस समस्या को हल करती है।

इस परिकल्पना के मुताबिक, मैं जो कुछ देख रहा हूं और जानता हूं वो सब मेरे आने के 5 मिनट पहले मेरी गलत याददाशत और इतिहास के साक्ष्यों को साथ अस्तित्व में आया। तो आप आप नहीं हैं, बल्कि मेरा ही अंश हैं और मैं बस आपका अंश हूं। आप जो कुछ भी जानते हैं, वो सब एक कल्पना है।

 

 

4. हो सकता है हाइपरवेलोसिटी स्टार्स धरती की तरफ आ रहे हो और हमने नोटिस नहीं किया हो।

 

रात में आसमान में जिन सितारों को देखकर हम विश मांगते हैं, यदि ये असल में पृथ्वी के निकट आ जाए तो तबाही मच जाएगी। हमारे उल्कापिंड धरती के पास आ जाए तो धरती का अस्तित्व मिट जाएगा। ये हाइपरवेलोसिटी स्टार्स पूरे ब्रह्मांड में अपनी ऊर्जा के कारण आसानी से भ्रमण करते हैं। ये आकाशगंगा के गुरुत्वाकर्षण से आसानी से बच जाते हैं। ये आराम से पूरे ब्रह्मांड में घूमते हैं और रास्ते में आने वाली चीज़ों को जला देते हैं। अभी तक सबसे तेज़ गति वाले उल्कापिंड, जिसकी खोज की गई है वो प्रति घंटे 20 लाख मील की दूरी तय करता है। अच्छी बात ये है कि हमारी धरती पूरे ब्रह्मांड का एक छोटा सा कण है इसलिए किसी उल्कापिंड के यहां आने की संभावना बहुत कम है और यदि कोई इस तरफ आ भी रहा हो, तो हमें पता नहीं चल पाएगा।

 

 

5. हम सभ्यताओं के एक अदृश्य पुराने विशाल फिल्टर की ओर जा रहे हैं।

 

विशाल ब्रह्मांड और मानव का यहां जीवित होना इस बात का सबूत है कि अरबों सितारों और ग्रहों वाले इस ब्रह्मांड में कहीं और भी जीवन की संभावना हो सकती है। चूकि इंसान कुछ साल पहले ही पृथ्वी पर आए हैं और ब्रह्मांड अरबों साल पुराना है जैसा की अनुमान लगाया जाता है, तो हो सकता है कि हमारे पहले भी ब्रह्मांड में कोई जीवन हो और यदि ऐसा हुआ तो अब तक वो मानव से भी ज़्यादा बुद्धिमान हो गए होंगे और वो आसानी से हम तक पहुंच सकते हैं, लेकिन अभी तक ऐसा कुछ हुआ नहीं है। ग्रेट फिल्टर की अवधारणा के मुताबिक, यदि कोई अलौकिक जीवन अभी तक मानव से नहीं टकराया है तो उसकी वजह ये है कि ग्रेट फिल्टर ब्रह्मांड में काम करता है और ये बुद्धिमान जीवों को विकसित होने से और फिल्टर की सीमा से बाहर जाने से रोकता है, जिससे वो विलुप्त हो जाते हैं।

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