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इन देशों में भी विचरते थे भगवान हनुमान

Published on 8 December, 2015 at 9:58 am By

आप में से अधिकतर लोग हनुमानजी के भगवान राम के प्रति स्नेह और इससे जुड़े किस्सों, प्रसंगों से परिचित होंगे। लेकिन आपको हैरानी होगी जब आपको पता चलेगा कि हनुमान न सिर्फ भारत और श्रीलंका में बल्कि मलेशिया और थाईलैंड जैसे देशों में भी विचरण करते थे। जी हां, उनका विशाल चरण चिह्न इस बात का प्रमाण है। यकीन न आ रहा हो तो यह फोटो देखिए।

प्रभु हनुमान के थाईलैंड में विशाल पवित्र चरण

प्रभु हनुमान के थाईलैंड में विशाल पवित्र चरण

राम भक्त हनुमान से जुड़े ऐसे ही 5 प्रसंग इस तरह हैं।

 

जब हनुमान जी ने मलेशिया में अपने विशाल पवित्र चरण जमाए

जब हनुमान जी ने मलेशिया में अपने विशाल पवित्र चरण जमाए


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1.इसलिए चढ़ाया जाता है, हनुमान जी को सिंदूर।

हनुमान जी भगवान राम के प्रति पूरी तरह समर्पित थे ।

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प्रसंग है कि एक बार जब सीता जी अपनी माँग में सिंदूर भर रही थीं, तब हनुमान जी ने ऐसा करने का कारण पूछा। सीता जी ने हनुमान को बताया की वह ऐसा भगवान राम के लंबी उम्र की कामना के लिए करती हैं। हनुमान भगवान राम को प्रेम करते थे, इसलिए उन्होंने अपने पूरे शरीर पर सिंदूर पोत लिया। जब इस बात का पता भगवान राम को चला, वह प्रसन्न हुए। उन्होंने हनुमान जी को आशीर्वाद दिया कि जो भक्त हनुमान को सिंदूर चढ़ाएगा उसकी मनोकामनाएं पूरी होंगी । तभी से भगवान हनुमान को सिंदूर चढ़ाए जाने की परम्परा है।

2. गंगा खुद हनुमान जी के चरण छूने आती हैं।

इलाहाबाद के हनुमान मंदिर की दिलचस्प बात यह है कि गंगा नदी का पानी चढ़ जाने के कारण यह जलमग्न हो जाता है।

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इलाहाबाद के हनुमान मंदिर के अंदर का दृश्य

 


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एक पौराणिक कथा के अनुसार देवी गंगा खुद अपना जल स्तर बढ़ा लेती हैं, ताकि वह हनुमान जी के चरण स्पर्श कर सकें। इस कथा की वजह से हनुमान भक्तों बीच यह मंदिर आकर्षण का केंद्र है। यहां हर साल लाखों लोग हनुमान जी के दर्शन करने आते हैं। यह अनूठा मंदिर इलाहाबाद फ़ोर्ट के पास स्थित है।

3. आख़िर कहाँ से लाए थे हनुमान जी संजीवनी पर्वत?



संजीवनी बूटी वाले पर्वत के बारे में कौन नही जानता, जिसे भगवान हनुमान लक्ष्मण के प्राणों की रक्षा के लिए अपने एक हाथ से उठा लाए थे।

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तो चलिए आज हम आपको यह भी बता दें की यह विशाल पर्वत कहां स्थित है। श्रीलंका के सुदूर इलाके में श्रीपद नाम का एक पहाड़ है और ऐसी मान्यता है कि यह वही संजीवनी वाला पर्वत है। श्रीलंकाई लोग इसे रहुमाशाला कांडा कहते हैं। इस पहाड़ पर एक मंदिर भी बना है। यह पर्वत लगभग 2200 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।

4. क्या आप जानते हैं कि भगवान हनुमान की सबसे बड़ी मूर्ति कहां स्थित है?

भगवान हनुमान की सबसे ऊंची मूर्ति आंध्र प्रदेश के एर्रावरम के वीर अभय अंजनी हनुमान स्वामी हैं। इसकी ऊंचाई 135 फुट है।

 वीर अभय अंजनी हनुमान स्वामी की विशाल मूर्ति

वीर अभय अंजनी हनुमान स्वामी की विशाल मूर्ति

 

5. इसलिए इस जगह नहीं पूजे जाते हनुमान।

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आपको यह पढ़ कर ज़रूर हैरानी हो रही होगी, लेकिन ऐसी मान्यता है की हनुमान जी जिस पर्वत को संजीवनी के लिए उठा कर लाए थे, वह द्रोणागिरि पर्वत पर स्थित था। हनुमान जी लक्ष्मण के प्राण की रक्षा करने के लिए यह पर्वत उठा ले गए थे, जिसका स्थानीय लोग पूजन करते थे। इस वजह से द्रोणागिरि के लोग हनुमान जी से नाराज़ हो गए।

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समुद्रतल से 14000 फुट की ऊंचाई पर द्रोणागिरि गांव आज भी उत्तराखंड के पास चमोली जनपद के जोशीमठ प्रखण्ड में स्थित है। यही वह गांव है जहां भगवान हनुमान नहीं पूजे जाते हैं और यहां तक कि इस गाव में लाल झंडा लहराना मना है।

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