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क्या आपको याद है लैंडलाइन का वो ज़माना जब स्मार्टफोन ख्वाबों से भी दूर थे

6:41 pm 27 Aug, 2017

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क्या आपको अपनी ज़िंदगी का वो सुनहरा समय याद है, जब स्मार्टफोन तो दूर मोबाइल भी नहीं हुआ करते थे? तब अपनों से बात करने के लिए एक ही साधन था और वो था लैंडलाइन फोन। जिसे आप उस समय की लाइफ लाइन भी कह सकते हैं। इसमें न तो इंटरनेट था और न ही चैटिंग की सुविधा बस फोन किया जा सकता और उठाया जा सकता था। लेकिन उसकी सबसे अच्छी बात ये थी कि आज की तरह हम घंटों फोन पर गॉसिप नहीं करते थे, बस काम की बात। यदि आप लैंडलाइन का वो सुनहरा ज़माना भूल चुके हैं, चो चलिए आप आपके लिए उस दौर की यादें ताज़ा कर देते हैं, जब लो बैटरी की समस्या नहीं होती थी।

1. उस ज़माने में जब आप दोस्तों के साथ खेलने जाते थे, तो आपकी मां आपके दोस्त के लैंडलाइन नंबर पर फोन करके आपको बुलाती थी।

2. आपके रिश्तेदार पड़ोसी के घर पर फोन करते थे और पड़ोस की आंटी चिल्लाती थी, ‘अरे चिंटू तुम्हारी मम्मी को भेजो दिल्ली से तुम्हारी बुआ का फोन आया है।’

3. जब आप फोन की रिंग सुनकर अंदाज़ा लगाते थे कि ये लोकल कॉल है एसटीडी या आइएसडी।

4. फोन उठाने के पहले ये सस्पेंस बना रहता था कि फोन किसका होगा, क्योंकि तब नंबर सेव करने की सुविधा नहीं थी।

5. जब हर हफ्ते आपके मम्मी-पापा पास वाले एसटीडी बूथ पर ले जाकर आपके दादा-दादी से बात करवाने ले जाते थे.

6. और आप पोस्टकार्ड्स और अंतर्देशी पत्र को कैसे भूल सकते हैं, आज के बच्चों ने तो शायद इनका नाम भी नहीं सुना होगा।

7. तब लैंडलाइन पर रोमांस का भी अलग ही मज़ा था।

8. तब ये लैंडलाइन ही ऑनलाइन दुनिया से जुड़ने का एकमात्र साधन था, इसलिए जब फोन की घंटी बजती थी, तो आप दौड़कर अपनी मां को फोन उठाने से रोकते थे, क्योंकि फोन उठाने पर इंटरनेट डिस्कनेक्ट हो जाता।

9. उस ज़माने में आपको ऑफिस जाते हुए ये कहकर आधे रास्ते नहीं लौटना पड़ता था कि ओह! मैं मोबाइल तो घर पर ही भूल गया।

10. तब आपकी मां व्हाट्सग्रुप की बजाय असल में पड़ोसवाली आंटी से बातें करती थीं।

11. वो सुनहरा वक़्त जब आपको अपने बर्थडे पर ग्रिटिंग कार्ड्स का इंतज़ार होता था, आज की तरह बस व्हाट्सअप और फेसबुक पर सबको सिर्फ़ थैक्स नहीं कहते थे।

12. तब बच्चे बिना किसी फोन गेम और विडियो गेम के खाना खा लेते थे और दादा-दादी के मुंह से कहानियां सुनते थे न कि यूट्यूब और स्मार्टफोन से।

13. तब सेल्फी का नहीं था कहीं नामोंनिशान।

14. वो सुनहरा वक़्त जब लो बैटरी की चिंता नहीं सताती थी।

15. तब आपके पास कोडैक कैमरा होता था, जिससे फोटो खींचने के बाद प्रिंट के लिए एक महीना इंतज़ार करना होता था।

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