भारत-पाकिस्तान की सरहद पर है लैला मजनूं की मजार, हर साल लगता है प्रेमियों का मेला

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9:07 pm 15 Jun, 2016

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जब भी प्यार की मिसालें दी जाती है, लैला मजनूं का नाम ज़रूर आता है। प्यार के दुश्मनों ने इन्हें जीते जी साथ रहने नहीं दिया, लेकिन मरकर इन दोनों का प्यार अमर हो गया।

भारत-पाकिस्तान की सीमा से सटे राजस्थान के बिंजौर गांव में देशभर से हर दिन सैकड़ों प्रेमी जोड़े और नवविवाहित दंपति लैला मजनू की मजार पर अपने प्रेम के अमर होने की दुआ मांगने पहुंचते हैं। यह जगह पाकिस्तान से महज 2 किलोमीटर दूर है।

ऐसा मानना है कि यह मजार आजादी के समय से ही अपने अस्तित्व में है। बंटवारे से पहले की ये मजार में सभी धर्मों के लोग दुआ लेकर पहुँचते थे। लेकिन बंटवारे के बाद यह मजार भारत के हिस्से में आई। लेकिन बंटवारे के बाद भी भारत के साथ-साथ पडोसी मुल्क पाकिस्तान से भी इस मजार में लोग पहुंचते है।

1960 से ही यहाँ पांच दिनों का मेला लगता है। हर साल जून महीने में सैकड़ों की तादाद में लोग इस मेले में पहुंचते हैं, जिसमें आना वाला हर शख्स इस उम्मीद के साथ आता है कि उसकी फरियाद जरूर कुबूल होगी।

Mela

wikimedia


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प्रेमी जोड़े यहां आकर धागा बांध शादी की मन्नते मांगते हैं। मन्नत पूरी हो जाने पर धागा खोल, मजार पर चादर चढ़ाकर शुक्रिया अदा करते हैं।

मजहब की दीवार को दरकिनार करते हुए, क्या हिन्दू, मुसलमान सिख और ईसाई, यहां सभी धर्मों के लोग आते हैं।



खास बात यह है कि लैला मजनू के मजार की पूरी देखभाल गांव में बसे हिन्दू परिवार ही करते हैं क्योंकि पूरे गांव में एक भी मुस्लिम परिवार नहीं है। मात्र हिंदू और सिख परिवार ही है।

जो भी प्रेमी जोड़े, विवाहित दंपति यहाँ पहुंचते हैं, उनके ठहरने से लेकर खाने-पीने जैसी सारी सुविधाओं की व्यवस्था पूरा गांव मिलकर करता है।

शुरू के सालों में यहाँ दो से तीन हज़ार लोग पहुंचते थे, लेकिन हर साल ये तादाद बढ़ती जा रही है जो अब 50 हजार को पार कर गई है।

लैला-मजनूं की मजार के रखरखाव के लिए गठित कमेटी का दावा है कि यह देश का एकमात्र ऐसा स्थान है, जहां लैला-मजनूं की मजार स्थित है।

हालांकि, इतिहासकार लैला-मजनूं के अस्तित्व से इनकार करते रहे हैं। वह लैला-मजनूं को मात्र काल्पनिक किरदार मानते हैं, लेकिन इन सब बातों से मजार पर हज़ारों की तादाद में आने वाले लोगों को कोई फर्क नहीं पड़ता। वह सब अपनी फरियादें ले उनके पूरे होने की उम्मीद लिए यहां पहुंच जाते हैं।


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