यह है लैला-मजनूं की मजार, प्यार में दे दी थी जान

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Updated on 9 Oct, 2016 at 4:18 pm

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आपने लैला-मजनूं का नाम तो सुना होगा, लेकिन क्या आपको पता है कि उनकी एक मजार भी है। जी हां, दुनिया के सबसे चर्चित प्रेमी जोड़ों में एक लैला-मजनूं की मजार है राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले में। यह मजार इतना प्रसिद्ध है कि इसे प्रेम और आस्था का प्रतीक माना जाता है।

मान्यता है कि लैला और मजनूं ने प्यार में विफल होकर अपनी जान यहां दे दी थी। खास बात यह है कि वे भले जीते-जी न मिल पाए, लेकिन उनकी मजार आसपास ही है। यह स्थान है गंगानगर जिले के अनूपगढ़ तहसील में। पाकिस्तानी की धरती यहां से महज दो किलोमीटर दूर है।

हिन्दू और मुसलमान दोनों झुकाते हैं सिर

भले ही लैला-मजनूं मुसलमान थे, लेकिन उनकी मजार पर हिन्दू भी उसी श्रद्धा से सिर झुकाते हैं जिस श्रद्धा से मुसलमान। कारगिल युद्ध के पहले तक तो यहां पाकिस्तानी भी आते थे। बाद में इस सीमा को बन्द कर दिया गया।

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प्रेमी युगल आकर खाते हैं कसमें

यह मजार प्रेमी युगलों में काफी लोकप्रिय है। यहां जून के महीने में होने वाले मेला में तमाम प्रेमी युगल शिरकत करते हैं। और साथ जीने-मरने की कसमें खाते हैं। कहा जाता है कि इन मजारों के ऊपर छतरी थी, लेकिन बाद में इस पर गुंबई का निर्माण कर दिया गया। मजार के ठीक नजदीक सेना की चौकी है, जिसे मजनूं चौकी कहते हैं।

यहीं दी थी जान

लैला-मजनूं के बारे में कई कहानियां प्रचलित हैं। उनकी मौत कब हुई थी, इसका कोई लिखित प्रमाण नहीं है, लेकिन कहा जाता है कि लैला का भाई मजनू के साथ उसके संबंधों के खिलाफ था। एक दिन गुस्से में आकर उसने मजनूं की हत्या कर दी। जब लैला को इस बात का पता चला तब उसने मजनूं की लाश के पास जाकर आत्महत्या कर ली।

एक अन्य कथा के मुताबिक लैला-मजनूं प्रेम में पड़ने के बाद घर से भाग गए थे। दर-दर भटकने के बाद वे यहां पहुंचे। इस दौरान प्यास लगने की वजह से उनकी मौत हो गई। कुछ लोग यह भी मानते हैं कि समाज ने जब उनके प्रेम को स्वीकृति नहीं दी तो उन्होंने यहां साथ में आत्महत्या कर ली।

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