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धार्मिक आस्था और विश्वास का प्रतीक है कुम्भ मेला, जानिए और भी 10 रोचक तथ्य

Updated on 30 January, 2017 at 6:29 pm By

कुम्भ मेला एक ऐसा आयोजन है, जहां श्रद्धालुओं का सबसे बड़ा जमावड़ा लगता है। इतनी बड़ी संख्या में दुनिया में और कहीं लोग एकत्रित नहीं होते। करोड़ों की तादाद में यहां हिन्दू श्रद्धालु पवित्र गंगा नदी में डुबकी लगा कर अपने पापों और जन्म मरण के चक्र से मुक्ति पाते हैं।

बारी-बारी हर तीसरे साल इस मेले का आयोजन – हरिद्धार, इलाहाबाद (प्रयाग), नाशिक और उज्जैन में होता है। यह आयोजन क्यों होता है, इसका कोई ऐतिहासिक प्रमाण नहीं है, लेकिन तमाम हिन्दू धार्मिक ग्रन्थों में इसका वर्णन मिलता है।


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चीनी मुसाफिर और इतिहासकार हुएनत्सांग के किस्से और कहानियो में भी इस मेले का जिक्र मिलता है। इस साल यह आयोजन जनवरी 27 से फ़रवरी 25 तक इलाहाबाद में हुआ। अगर आपने अभी तक इसे अनुभव नहीं किया है, तो आपका यह जानना जरूरी है कि हमें वहां क्यों जाना चाहिए।

1. यहां एकसाथ जमा होते हैं सबसे अधिक लोग

अनुमान लगाया जाता है कि पूरे विश्व में कुम्भ मेले में आए लोगों की गिनती किसी और आयोजन या मेले में आने वाले लोगों की गिनती से बहुत अधिक होती है।

आपको जानकार आश्चर्य होगा की 1997 तक, 1.5 करोड़ लोगों के इस आयोजन में भाग लेने का रिकॉर्ड है, जो 1989 तक 2.9 करोड़ लोगों तक पहुंच गया। वर्तमान में यह संख्या 6-8 करोड़ तक हो गई है।

यहां आने वाले लोगो की संख्या इतनी ज़्यादा है कि जो लोग गंगादर्शन को आते हैं, उनका रिकॉर्ड रखना मुश्किल हो गया है।

2. विख्यात उत्सव

कुम्भ मेला लोगों की धार्मिक आस्थाओं की गहराई और विश्वास का प्रतीक है। बूढ़े हो या जवान, बीमार हो या तंदुरुस्त, सभी पवित्र गंगा में डुबकी लगाने आते हैं, जिसे हिंदू – एक नदी की बजाए – एक देवी की तरह पूजते हैं।

मान्यताओं के मुताबिक, गंगा नदी लोगों के पापों को धोकर मुक्ति प्रदान करती है अर्थात स्वर्ग का मार्ग दिखाती है। पूरा विश्व इस आयोजन की विशालता से अचंभित है।

इस आयोजन के प्रति लोगों में बहुत आस्था है और यहां आए लोगों को देखने की लिए विदेशी पर्यटक ख़ासकर कुम्भ मेले के आयोजन के समय ही भारत आते हैं।


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3. यह है खुद को खोजने का अवसर

होली, दीपावली की तरह का त्योहार न होते हुए भी कुम्भ के प्रति लोगों की आस्था किसी भी अनुमान या सोच से कहीं अधिक है। लोगों में इस आयोजन के लिए काफी उत्साह और आस्था है।

आम मान्यता है कि कुम्भ के समय पवित्र गंगा नदी में स्नान करने से दुःख और तकलीफों से मुक्ति मिलती है।

यही कारण है कि हर प्रकार की तकलीफ सहने के बाद भी भारत के कोने-कोने से लोग खुद की खोज में आते हैं।

4. ‘प्राचीन’ है कुम्भ मेला

तीन पवित्र नदियों – गंगा, जमुना और सरस्वती की त्रिवेणी जहां मिलती है, अर्थात संगम से कई पुरानी यादें जुड़ीं हैं।

ऐसी मान्यता है की संगम के तट पर ही ऋषि भारद्वाज का आश्रम बना हुआ है, जिसमें भगवान राम, भाई लक्ष्मण और पत्नी सीता के साथ वनवास के समय आकर रुके थे। इसके अलावा प्राचीनकाल में शंकराचार्य और चैतन्य महाप्रभु भी कुम्भ दर्शन को गए थे।

इन बातों की वजह से कुम्भ की काफी मान्यता है और तक़रीबन हर हिन्दू अपने जीवन काल में एक बार कुम्भ मेले में जरूर जाना चाहता है।

5. कुम्भ का जादुई आकर्षण



सरलतम शब्दों में कुंभ का अर्थ है ‘एक घड़ा’, पर इस शब्द का अर्थ अधिक गहरा है। कुंभ – समुद्र, पृथ्वी, मानव शरीर, सूरज और विष्णु का पर्याय है। यह इसलिए, क्योंकि समुन्दर, नदियों, तालाब को धरती घेरे रहती है। धरती पर आकाश बिछा रहता है। आकाश पर सूरज होता है। मानव शरीर को कोशिका और ऊतक ढके होते हैं। अर्थात, सब कुछ के चारों ओर किसी तरह का घड़ा होता है, जो उसे ढके रखता है।

कुम्भ का अर्थ, हमारी सोच से भी अधिक अर्थपूर्ण और गहरा है। लेकिन यह सब आप यहां की यात्रा कर के ही अधिक अच्छी तरह समझ सकेंगे।

6. अनूठे अनुष्ठान का हिस्सा बनना

हिन्दुओं का मानना है कि कुम्भ के दिन पवित्र गंगा के जल में डुबकी लेने से उनके और उनके पूर्वजों के पाप धुल जाएंगे और वे दोषमुक्त हो जाएंगे। इस दिन नया चांद आकाश में प्रकट होता है। स्नान के लिए इस मौके पर भक्त नदी के तट पर सुबह 3:00 बजे से एकत्रित होना शुरू कर देते हैं।

साधु और नागा बाबाओ की पहले आकर स्नान करने की प्रतिस्पर्धा को देखना एक शानदार अनुभव है। स्नान कर हर कोई नए कपड़े पहनता है और साधुओ के प्रवचन सुनता है।

7. ईश्वर की भक्ति और शांति में समर्पण

इस आयोजन में भाग लेने से ही आप एक अद्भुत आनंद का अनुभव करते हैं। दिन में तीन बार गंगा में डुबकी लेने, विशेष योग कक्षाओं में भाग लेने, व्याख्यान में भाग लेने, सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेने और आरतियों में बैठने से आप आत्मा की शुद्धि कर सकते हैं परम शांति प्राप्त कर सकते हैं।

यह एक मौका होता है, जब आप कई विद्वान हिंदू आध्यात्मिक नेताओं, प्रचारकों और साधुओं से मिल सकते हैं। उनके प्रवचन सुन सकते हैं। वह भी एक ही स्थान पर।

8. तम्बू में जीवन का अनुभव

हालांकि, आप निजी होटल या घर में रहने का विकल्प चुन सकते हैं, पर सबसे अच्छा अनुभव है, नदी किनारे तम्बुओं में रहना।

यह न केवल आप को साधुओं के साथ जीवन जीने और उन्हें जानने का मौका देता है, बल्कि यही पर आप हिन्दू धर्म के बारे में अधिक जान सकते हैं।

यही नहीं, आपको कुंभ मेले के महत्व एवं यहां सीखी हुई बातें अपने सामान्य जीवन में कैसे अपनाएं, इस बारे में भी महत्त्वपूर्ण सीख मिलेगी।

9. डुबकी लगाओ और इच्छा पूरी करो

हिन्दू पौराणिक कथाओं के अनुसार, पृथ्वी पर केवल कुंभ मेला एक ही ऐसी जगह है, जहां आप अपने पापों से मुक्त हो सकते हैं। जन्म और मृत्यु के चक्र से आज़ाद हो सकते हैं।

यहां गंगा नदी के पवित्र जल में डुबकी लगाने और उससे मिले आशीर्वाद से निर्वाण मिलता है। इसके अलावा कई लोग यह भी मानते हैं कि अगर आप शाम में एक दीया जलाएं और उसे पानी में प्रवाहित कर कोई दुआ मांगें, तो वो ज़रूर पूरी होगी।

10. पवित्र स्थान

कुम्भ के मेले में आने का लोगों का मुख्य कारण गंगा नदी में पवित्र स्नान है।

वैसे जितने समय के लिए यह आयोजन होता है, उस पूरे समय को ख़ास माना जाता है, फिर भी इन ख़ास दिनों में भी कुछ दिन अति महत्वपूर्ण होते हैं। इन महत्वपूर्ण दिनों पर वहां आए सभी बड़े साधु, संत व नागा बाबा (वह बाबा जो वस्त्र धारण नहीं करते) पवित्र गंगा नदी में स्नान करते हैं।

नव चन्द्रमा दिवस पर भी ये साधु, संत और नागा बाबा सूर्योदय से पहले स्नान करने के लिए एकत्रित होते हैंं।


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