ट्रेन की ऐसी विदाई आपने कभी देखी नहीं होगी, इतिहास के पन्नों में सिमटी कोसी क्षेत्र की छोटी रेल लाइन

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Updated on 29 Dec, 2016 at 5:49 pm

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कोसी क्षेत्र की छोटी रेल लाइन की विदायी हो गई है। पिछले शनिवार को इस रेल लाइन पर आखिरी बार ट्रेन गुजरी, तो लोग भावुक हो उठे। उनकी आंखें छलछला गईं। ऐतिहासिक कोसी प्रमंडल की इस रेल लाइन पर प्रतिदिन गुजरने वाली छह जोड़ी ट्रेनें अब नहीं दिखेंगी। सहरसा-सुपौल-थरबिटिया के बीच 37 किमी बड़ी रेललाइन का विस्तार होने की वजह से छोटी रेल लाइन या मीटरगेज पर दौड़ने वाली ट्रेन को बंद कर दिया गया है।

इस रेल लाइन पर आखिरी ट्रेन को विदायी के वक्त दुल्हन की तरह सजाया गया था। इस ट्रेन को लोगों ने फूलों से सजाकर, अवीर गुलाल लगाकर, बैंड बाजा के साथ विदायी दी। इस अवसर पर स्थानीय लोगों ने एक समारोह का आयोजन किया, जिसमें गार्ड, चालक और सहायक चालक सहित स्टेशन मास्टर को मिथिला क्षेत्र का लोकप्रिय पाग व दोपटा देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर ट्रेन चालक ने सेवा करने का मौका देने के लिए सभी को धन्यवाद दिया।

कोसी नदी की विभिषिका झेल रहे इस क्षेत्र में छोटी रेल लाइन को जीवन रेखा माना जाता रहा है। वर्ष 1854 में अंग्रेज सरकार द्वारा भारत में रेल सेवा प्रारंभ की गई। जैसे-जैसे रेल से जुड़ी सेवाओं में विस्तार होता गया, क्षेत्र के हिसाब से प्रगति भी होती रही। बाद के दिनों में देश में बड़ी रेल लाइन का विस्तार हुआ, लेकिन कोसी प्रमंडल का इलाका खासकर सहरसा-फारबिसगंज उपेक्षित रहा।


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सहरसा में वर्ष 2005 में बड़ी रेल लाइन का विस्तार हुआ और पहले सहरसा-मानसी रेलखंड पर बड़ी रेल लाइन की पटरी बिछी। बाद में वर्ष 2008 में कुसहा त्रासदी दौरान सहरसा-कटिहार रेलखंड में मधेपुरा और मुरलीगंज के बीच रेल पटरी बह गई।

इसी तरह सहरसा-फारबिसगंज रेलखंड पर प्रतापगंज के पास रेल पटरियां पूरी तरह ध्वस्त हो गई थीं। रेल मंत्रालय ने उसे दुरूस्त करने की बजाय बड़ी रेल लाइन की पटरी बिछाने की घोषणा की।

इस इलाके में छोटी लाईन पर रेल परिचालन बंद हो जाएगा, लेकिन इसकी यादें लोगों के जेहन में हमेशा जिन्दा रहेंगी।

साभारः SUNO

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