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विडियोः कोलकाता में जरा सी बारिश और डूब गई बस

9:42 am 4 Sep, 2017

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कोलकाता के बारे में अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी ने एक बार कहा था कि यह मरता हुआ शहर है। उनके बयान पर काफी हो-हल्ला मचा था। आज अगर राजीव गांधी हमारे बीच होते तो उन्हें कोलकाता के मरणासन्न होने के कई उदाहरण सामने मिल जाते। पश्चिम बंगाल में वर्ष 2011 में सत्ता परिवर्तन से पहले ही ममता बनर्जी ने दावा किया था कि उनकी पार्टी की सरकार आने पर कोलकाता शहर को लंदन में तब्दील कर दिया जाएगा। यह अलग बात है कि पिछले 6 सालों में कोलकाता शहर लंदन तो नहीं बन सका, अलबत्ता इसकी आधारभूत संरचना और खराब जरूर हुई है।

शहर की हालत ऐसी है कि 10 मिनट की बारिश में हर तरफ पानी जमा हो जाता है। कचरा प्रसंस्करण में यह शहर सिफर है। गंदगी का अंबार है। कोलकाता में जलजमाव की स्थित जानलेवा है। ज़रा सी बारिश हुई नहीं कि अधिकांश सड़क पानी से लबालब भर जाते हैं। पुराने ड्रेनेज कहां खुले हैं, कहां मरम्मत चल रहे हैं, कुछ पता नहीं चलता। चूंकि यह जलजमाव लम्बे समय तक चलता है, लिहाजा दुर्घटना होने की आशंका बनी रहती है।

ऐसी स्थिति में एक विडियो वायरल हो रहा है, जिसमें दिख रहा है कि एक बस शहर के अंडरपास में पानी में डूब गई है।


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यह विडियो उत्तर कोलकाता के पातीपुकुर रेल ब्रिज के नीचे का है। इसमें आप देख सकते हैं कि यह बस लगभग पूरी तरह डूबने की कगार पर है। जब पानी बस के अन्दर दाखिल हुआ तो लोग चिल्लाने लगे। बाद में स्थानीय लोग मदद के लिए आए यात्रियों को बांस और लट्ठों के सहारे बाहर निकला गया। यह प्राइवेट बस 3सी/1 रूट की थी।

इस घटना में जान बचाने वाले एक यात्री का कहना थाः

“बस के अन्दर ऐसा लग रहा था कि वे लोग डूबकर मर जायेंगे। अंडरपास से निकलने का भी रास्ता कठिन है और बस के डूबने की स्थिति में बचकर निकलना मुमकिन नहीं हो पाता। स्थानीय लोगों की मदद से जान बची।”

स्थानीय लोगों का कहना है कि जरा सी बारिश में अंडरपास की ये स्थिति हो जाती है। बस ड्राइवर इस स्थिति को भांप नहीं सका और बस आगे ले गया जिससे एक बड़ा हादसा होते-होते रह गया।

कोलकाता में जलजमाव की समस्या पुरानी है। जरा सी बारिश हुई नहीं कि दक्षिण कोलकाता के गरियाहाट, रासबिहारी, टालीगंज, बेहाला के विभिन्न सड़क के साथ-साथ, पार्क स्ट्रीट, शेक्सपीयर सरणी, चितरंजन एवेन्यू, आमहर्स्ट स्ट्रीट, खिदिरपुर, बड़ाबाजार के इलाके पूरी तरह जनमग्न हो जाते हैं।

इसका कोई न कोई समाधान नगर निगम को निकलना ही होगा, नहीं तो किसी बड़े दुर्घटना की संभावना को टालना मुश्किल है।

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