कोलकाता के ऑटोमैटिक कसाईखाने पर आफत, हो सकता है बंद

Updated on 1 Jun, 2017 at 11:10 am

Advertisement

कोलकाता का पूरी तरह से ऑटोमैटिक कसाईखाना अब बंद होने के कगार पर है। कोलकाता म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन इस महीने के अंत तक इसे बंद करने का फैसला ले सकता है। मवेशियों को बेचने पर नए कानून से कसाईखाना खासा प्रभावित हुआ है।

गोरक्षा के नाम पर चलाये जा रहे अभियान और मवेशियों की बिक्री के नए कानून ने देश के पहले ऑटोमैटिक कसाईखाने को तंगी के कगार पर ला खड़ा किया है।

केएमसी हेल्थ डिपार्टमेंट के अनुसार 800 भैंसें अमूमन रोज कसाईखाने में पहुंचते थे। देश भर में गाय को लेकर मचे बवाल के बाद यह संख्या गिरकर 200 तक पहुंच गई है, जिससे कसाईखाने का काम ठप्प सा हो गया है। पूरी तरह से ऑटोमैटिक इस कसाईखाने में प्रतिदिन 1200 पशुओं को स्टोर करने और उन्हें काटने की व्यवस्था है। आपूर्ति के अभाव में न्यूनतम काम भी नहीं हो पा रहा है।


Advertisement

कसाईखाने की शुरुआत 2012 में की गई थी। सफाई के मानकों का पूरा ध्यान रखते हुए मीट सप्लाइ के लिए यह कसाईखाना खोला गया था। कसाईखाने का निर्माण 25 करोड़ की लागत से किया गया था जो कि भारत के सबसे महंगे लागत वाले कसाईखानों में से एक है।

अब कोलकाता में छोटे पैमाने पर व्यक्तिगत तौर पर चलाए जा रहे कसाईखाने ही बचे हैं, जहां बिना मेडिकल जांच के ही बड़े जानवरों को मीट के लिए काटा जा रहा है।

पश्चिम बंगाल में उद्योग धंधे की हालत के बारे में सबको पता है। ऐसे में यहां उद्योग के नाम पर कसाईखाने ही बचे दिख रहे हैं। अब ये भी बंद हो जाएंगे तो फिर बचेगा क्या ?

Advertisement

आपके विचार


  • Advertisement