क्या आपको पता है कि हिटलर की कमाई का आखिर क्या हुआ?

Updated on 8 Jun, 2017 at 1:57 pm

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हिटलर को एक क्रूर और महत्वाकांक्षी शासक के तौर पर जाना जाता है, लेकिन आपको बता दें कि हिटलर एक कलाकार भी था जो जेल जाकर लेखक में तब्दील हो गया।

हिटलर ने शुरुआती दिनों में पोस्टकार्डों पर चित्र बनाकर अपना निर्वाह किया। 1923 ई. में हिटलर ने जर्मन सरकार को उखाड़ फेंकने का प्रयत्न किया। इसमें वे असफल रहे और जेलखाने में डाल दिए गए। वहीं, उन्होंने मीन कैम्फ (मेरा संघर्ष) नामक अपनी आत्मकथा लिखी। इसमें नाजी दल के सिद्धांतों का विवेचन किया। किताब लिखने के पीछे एक मंशा ये थी कि रिहाई की प्रक्रिया में हो रहे खर्च को पुस्तक के जरिए निकाला जाय, लेकिन शुरू में यह पुस्तक लोगों का ध्यान आकर्षित करने में असफल रहा। कुछ साल बाद यह बाजार पकड़ने लगा और एक बड़ा हिट साबित हुआ।


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हिटलर की मृत्यु के समय (1945) तक ये किताब 8 मिलियन प्रति बिक चुकी थी और लगभग 16 भाषाओं में अनुवाद भी किया जा चुका था। इस किताब से प्रति वर्ष एक मिलियन डॉलर रॉयल्टी के रूप में मिलने लगे थे।

इसमें कोई शंका नहीं है कि इस किताब से हिटलर ने मोटी कमाई की। इस बात से स्वयं हिटलर भी सहमत होंगे। अब सवाल उठता है कि हिटलर के कमाये धन का क्या हुआ?

हिटलर के चांसलर बनने के बाद उनकी लोकप्रियता से इस किताब को भी खूब मुनाफ़ा हुआ। स्थानीय निकायों द्वारा भारी संख्या में किताब खरीदकर बांटे जाने लगे और इससे हिटलर एक धनी व्यक्ति हो गए।

हिटलर की मृत्यु के बाद इसके छापने पर बैन लगा दिया गया। मृत्यु के 70 साल के बाद 2015 में जब ये किताब कॉपीराइट से मुक्त होकर जनसुलभ हो गया है तो फिर से इसकी चर्चा शुरू हो गयी है।

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