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खाप पंचायत में बदलाव की बयार; बेटियों के पक्ष में कई फैसले

Published on 3 January, 2016 at 1:57 pm By

हरियाणा की खाप पंचायतें अपने बेतुके निर्णयों के लिए कुख्यात रही हैं। हालंकि उनमें बदलाव की बयार दिख रही है। खाप पंचायत द्वारा लिए गये एक फ़ैसले का लोगों ने जम के स्वागत किया है। क्योंकि यह फ़ैसला बदलाव की एक उम्मीद दिखाती है।

खाप पंचायत ने यह आदेश ज़ारी किया है की 2 बेटियों के बाद तीसरी संतान पर मनाही होगी। इस फ़ैसले को लोग सकरात्मक मान रहे हैं।


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माना जा रहा है कि इस फ़ैसले के बाद कन्या भ्रूण हत्या पर रोक लग सकती है, जो हरियाणा में सर्वाधिक देखने को मिलती है। 2012 के जनगणना के आकड़ों के अनुसार, हरियाणा में पुरुषों की तुलना में महिलाओं का अनुपात बहुत ही कम है। अनुपात संख्या 1000:883 है। इसे औसत से कम माना जाता है। लेकिन इस नये नियम के अनुसार इस एक छोटे प्रयास से स्थिति में सुधार होने की संभावना है।

इसके अलावा खाप पंचायत ने यह भी निर्णय लिया है की दूल्हे के परिवार द्वारा दुल्हन पक्ष से लिए जाने वाले दहेज की कीमत सिर्फ़ 1 रुपये होगी।

खाप पंचायत के इस फ़ैसले का एक सकरात्मक परिवर्तन के रूप में स्वागत किया जा रहा है, क्योंकि हरियाणा में हमेशा ही दहेज और इससे संबंधित अपराधों की खबरें प्रकाश में आती रहती हैं।

खाप पंचायत अपने रूढ़िवादी और बेतुके फ़ैसलों से पहले भी हमें आश्चर्यचकित कर चुके हैं। पहले जहां बलात्कार के लिए नूडल्स को दोषी ठहराया था। वहीं मोबाइल का उपयोग और जीन्स पहनने वाली महिलाओं को चरित्रहीन बताया था।



यही नहीं, खाप पंचायत ने उन जोड़ों को सम्मानित करने का भी फ़ैसला किया है, जो दो बेटियों के बाद तीसरी संतान नहीं चाहते हैं।

साथ ही खाप पंचायत ने दूल्हे के साथ जाने वाली बारात की संख्या भी निर्धारित की है। यह फरमान जारी किया गया है की बारातियों की संख्या 21 से ज़्यादा नही होगी।

बूरा खाप के मुखिया राजवीर बूरा कहते हैंः
 “यह निर्णय बहुत ही आवश्यक था, क्योकि बारातियों की बहुत ज़्यादा संख्या से दुल्हन के परिवार पर अनावश्यक वित्तीय बोझ बढ़ जाता है।”

साथ ही यह फ़ैसला भी लिया गया है की अगर परिवार में किसी की मृत्यु हो जाती है, तो शोक अवधि अब 13 दिन की बजाए 7 दिन कर दिया जाए।


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रजबीर बूरा इस सन्दर्भ में कहते हैंः

 “शोक की अवधि में उस पुरानी प्रथा पर भी रोक लगा दी गयी है जिसमें ऐसे वक़्त में गेहूँ और घी का उपयोग वर्जित था”
 है ना यह एक सकरात्मक बदलाव की बयार ..?? 

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