कभी खंडवा के रेलवे स्टेशन पर भीख मांगने वाला ये बच्चा आज ऑस्ट्रेलियाई बिज़नेसमैन बन चुका है

Updated on 10 Nov, 2018 at 5:42 pm

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दुनिया में कुछ लोग तो ऐसे होते हैं जिनके पास सारी सुविधाएं होते हुए भी वो अपने जीवन में कुछ हासिल नहीं कर पाते। वहीं कुछ ऐसे भी होते हैं जो बिना किसी सुविधा के कामयाबी की बुलंदियों तक पहुंच जाते हैं। ऐसा ही एक बच्चा है मध्यप्रदेश के खंडवा जिले का। कभी ट्रेन में भीख मांगने वाला ये बच्चा आज ऑस्ट्रेलिया में बिज़नेसमैन बन चुका है।

 

 


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शेरू नाम का खंडवा जिले का छोटा सा बच्चा अब सारू ब्रायली बन चुका है। शेरू की ज़िंदगी इतनी संघर्ष भरी और दिलचस्प है इस पर हॉलीवुड फ़िल्म ‘लॉयन’ बन चुकी है। इस फ़िल्म में अभिनेता देव पटेल ने शेरू का किरदार निभाया है और इस फ़िल्म के लिए उन्हें ऑस्कर में भी नॉमिनेट किया गया है। फ़िल्म भारत में 27 जनवरी को रिलीज़ होगी।

 

 

शेरू की ज़िंदगी जितनी संघर्षपूर्ण रही, उतनी ही दिलचस्प भी। खंडवा के गरीब परिवार में जन्में शेरू का एक बड़ा भाई और एक बहन भी थी। उसके पिता मौसीन खान मज़दूरी करते थे और मां फ़ातिमा बी घरों में नौकरानी का काम करती थी। शेरू और उसका बड़ा भाई गुड्डू ट्रेन में भीख मांगकर गुज़ारा करते थे। एक बार ट्रेन में भीख मांगने के दौरान शेरू का बड़ा भाई गुड्डू आगे निकल गया और शेरू को ट्रेन में ही नींद लग गई और वो कोलकाता जा पहुंचा।



वहां कई दिनों तक स्टेशन पर ही वो रोता रहा। एक दिन नवजीवन नाम की संस्‍था में काम करने वाले एक शख्स की नज़र शेरू पर पड़ी और वह शेरू को संस्‍था में ले आया। ये संस्था अनाथ बच्चों के लिए काम करती है, लेकिन इस दौरान भी उसका जीवन बड़ा ही कष्टों से बीता। तभी एक ऑस्ट्रेलिया कपल आए और उन्होंने शेरू को गोद ले लिया और यहीं से शेरू की किस्मत बदल गई। ऑस्ट्रेलिया के ब्रायली दंपती ने शेरू को गोद लिया और अपने साथ ले गए।

 

 

वहां शेरू 20 सालों तक रहा और बिज़नेस मैनेजमेंट की पढ़ाई पूरी करके सफ़ल बिज़नेसमैन बन गया, लेकिन उसका मन अपने परिवार से मिलने के लिए तड़पता रहता था। आखिरकार उसने अपने परिवार को ढूंढ़ लिया और 2012 में खंडवा पहुंच गया। जिसके आने की उम्मीद छोड़ दी थी उस शेरू को देखकर माता-पिता की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।

 

 

आज ऑस्ट्रेलिया में रहकर भी वो अपने परिवार की आर्थिक मदद करता है। शेरू ने अपनी ज़िंदगी की यादों को एक किताब के पन्ने पर उतारा और इसी किताब पर ऑस्ट्रेलिया के मशहूर निर्देशक एंड्रू फ्रेजर ने फ़िल्म बना डाली।


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