केरल के 1.24 लाख छात्रों का नहीं है धर्म से वास्ता, दिखाया रास्ता

6:46 pm 29 Mar, 2018

Advertisement

देशभर में जाति और धर्म पर लगातार राजनीति हो रही है। ऐसे में केरल से आ रही खबर अनुकरणीय साबित हो सकती है। इस खबर के मुताबिक, केरल  के करीब 1.24 लाख छात्रों ने प्रवेश पत्र के फॉर्म पर अपना धर्म और जाति लिखने से इन्कार दिया है। उन्होंने ऐसा कर न केवल राजनीतिज्ञों को सोचने पर मजबूर किया है, बल्कि आरक्षण की राजनीति कर अपनी रोटी सेंकने वालों को भी करार जवाब दिया है।

 

केरल के सरकारी आंकड़े कहते हैं कि 9000 सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में नामांकन के समय 1.24 लाख छात्रों ने फ़ॉर्म में जाति और धर्म के कॉलम को खाली छोड़ दिया है। इसका प्रभाव बुधवार को स्टेट असेंबली में भी देखा गया जब मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के विधायक डी.के.मुरली ने प्रश्न किया कि कितने छात्रों ने नामांकन फॉर्म पर जाति और धर्म का कॉलम खाली छोड़ा है!

 

 


Advertisement

उनके इस प्रश्न के जवाब में शिक्षा मंत्री सी. रवीन्द्रनाथ ने कहा कि 1-10 क्लास में पढ़ने वाले 1,23,630 छात्रों ने धर्म या जाति से वास्ता बताने को इन्कार किया है। वहीं, 11वीं से 278 और 12वीं से 239 छात्रों ने धर्म और जाति के स्थान पर कुछ नहीं लिखा। हालांकि, इस विषय में जिलेवार जानकारी उपलब्ध नहीं है।

 

ये छात्र पूरे देश के छात्रों के लिए प्रेरणा बने हुए हैं। इन्हें अपनी प्रतिभा पर पूरा भरोसा है। ये गंदी राजनीति करनेवालों के हथियार बने आरक्षण के बल पर नहीं, बल्कि अपने दम पर कुछ कर दिखाना चाहते हैं। छात्र अगर ऐसा करने लगें तो आरक्षण के बवाल को सदा के लिए शांत किया जा सकेगा। इस पर एक नई बहस शुरू हो गई है कि आखिर फॉर्म पर ऐसी जानकारियां मांगी ही क्यों जाती हैं।

 

 

देश की इन प्रतिभाओं पर हमें नाज है!

Advertisement

आपके विचार


  • Advertisement