गुरुवायुर मंदिर में पूजा कर बुरे फंसे केरल के पर्यटन मंत्री

Updated on 16 Sep, 2017 at 5:28 pm

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मार्क्सवादी धर्म, आडंबर और कर्मकांड में यकीन नहीं करते। मार्क्सवाद के सिद्धान्त में धर्म को अफीम की संज्ञा दी गई है। मार्क्सवादी नेता दावा करते हैं कि वे न तो किसी मंदिर में जाते दिखते हैं और न ही मस्जिद या चर्च में। यही वजह है कि केरल के पर्यटन मंत्री कदाकम्पल्ली सुरेंद्रन को मशहूर गुरुवायुर मंदिर में पूजा-पाठ कर फूल चढ़ाना भारी पड़ गया है। अष्टमी रोहिणी के अवसर पर सुरेंद्रन ने मंदिर में जाकर प्रार्थना की और फूल चढ़ाए। उनकी यह बात सत्तारूढ़ लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट को बिल्कुल पसंद नहीं आई और इस पर अब बहस छिड़ गई है।

सुरेंद्रन कम्यूनिस्ट पार्टी और इंडिया (मार्क्सवादी) से हैं और एक टीवी चैनल में उन्हें भगवान को फूल चढ़ाते दिखाया गया। साथ ही वह हाथ जोड़कर प्रार्थन करते हुए दिखे।


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दरअसल, सुरेंद्रन मंदिर के एक दिन के दौर पर थे। मंदिर के अधिकारियों ने कहा का मंत्री ने कुछ पैसे दान भी दिए हैं। इस बीच, बहस छिड़ने के बाद सुरेंद्रन ने कहा है कि उन्होंने जो किया वो मंत्री होने के नाते उनकी ज़िम्मेदारी थी और उन्होंने बस अपने कर्तव्य का निर्वहन किया है, क्योंकि वह मंदिर से जुड़े मामलों के इन्चार्ज हैं। हालांकि, उनके कुछ साथी कॉमरेडों ने उनकी इस बात का विरोध करते हुए कहा है कि मंदिर में पूजा करना मंत्री की ड्यूटी में शामिल नहीं है।

साथी कॉमरेडों का कहना है कि 2006-11 के बीच जी सुधाकरण जो सुरेंद्रन के ही ओहदे पर थे, ने मंदिर का दौरा किया था, लेकिन वह किसी तरह की पूजा में शामिल नहीं हुए था। उस समय के मुख्यमंत्री वीएस अच्युतानंदन भी 2007 में सबरीमाला गए थे, लेकिन मंदिर के किसी क्रियाकलाप में शामिल नहीं हुए।

कम्यूनिस्ट पार्टी की गाइडलाइन के मुताबिक पार्टी से जुड़े नेताओं और लोगों को किसी भ तरह के धार्मिक आयोजन करने और उसमें शामिल होने की मनाही है। हालांकि, पश्चिम बंगाल में कई मार्क्सवादी नेता मंदिर जाकर पूजा अर्चना करने के लिए जाने जाते रहे हैं। कोलकाता में मार्क्सवादी नेता और समर्थक दुर्गा पूजा के पंडाल में भी अंजली देेते नजर आते रहे हैं।

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