पाकिस्तान में स्थित शिव मंदिर और सरोवर क्यों हैं हिंदुओं के लिए पवित्र तीर्थ !

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Updated on 20 May, 2017 at 12:58 pm

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पाकिस्तान के पंजाब की राजधानी लाहौर से 270 किलोमीटर की दूरी पर चकवाल जिले में स्थित कटासराज मंदिर परिसर में आदिकाल से स्वयंभू शिवलिंग विराजमान हैं। हिंदू मान्यताओं के अनुसार जब शिव की पत्नी सती का निधन हुआ, तब शिव इतना रोए कि उनके आंसू रुके ही नहीं और उन्हीं आंसुओं के कारण दो तालाब बन गए। इनमें से एक पुष्कर (राजस्थान) में है और दूसरा यहां कटाशा है। संस्कृत में कटाशा का मतलब आंसू की लड़ी है, जो बाद में कटास हो गया।

पाकिस्तान में स्थित इस मंदिर को शक्तिपीठ देवी हिंगलाज के नाम से जाना जाता है, लेकिन शक्तिपीठ के अलावा वहां पर एक प्राचीन शिवलिंग भी स्थित है। इस शिवलिंग के विषय में माना जाता है कि यह आदिकाल से यहां स्थित है।

शिव के आँसुओं से बने इस तालाब को कटासराज सरोवर के नाम से जाना जाता है। हिंदू धर्म के मानने वाले इस तालाब के पानी को पवित्र मानते हैं और हर साल भारत समेत दुनिया भर से हिंदू श्रद्धालु यहां आते हैं। लेकिन पाकिस्तान सरकार के अपेक्षा के कारण अब ये सरोवर सूख चुका है।

इस शिवलिंग के विषय में माना जाता है कि यह आदि काल से यहां स्थित है.youngistan


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कटासराज में प्राचीन शिव मंदिर के अलावा और भी मंदिरों की श्रृंखला है, जो दसवीं शताब्दी के बताए जाते हैं। इनमें भगवान लक्ष्मीनारायण, हनुमानगढ़ी, सातघर मंदिर, सीतागढ़ी शिवमंदिर प्रमुख हैं। कटासराज मंदिर का सरोवर का महत्व महाभारत काल में भी वार्णित है।



महाभारत में प्रसंग है कि पांडव वनवास के दिनों में नमक कोह पर्वत शृंखला (आज के पाकिस्तानी पंजाब के उत्तरी भाग) पहाड़ियों में अज्ञातवास में रहे। ऐसा माना जाता है कि पांडवों ने अपने अज्ञातवास के 14 वर्ष के दौरान चार वर्ष इस मंदिर परिसर में बिताए थे। हिंदू धर्मशास्त्र के अनुसार मंदिर परिसर में स्थित सरोवर वही कुण्ड है, जहाँ पांडव प्यास लगने पर पानी की खोज में पहुंचे थे। इस कुण्ड पर यक्ष का अधिकार था, जिनके प्रश्नो का उत्तर धर्मराज युधिष्ठिर ने दिए थे।

वहीं, अब पिछले दिनों पाकिस्तान के अखबार डॉन के हवाले से यह खबर आई है कि 900 वर्ष पुराने इस मंदिर परिसर में स्थित हिंदुओं का यह पवित्र सरोवर सूख चुका है।

डॉन की रिपोर्ट के अनुसार मंदिर परिसर के पास स्थित एक सीमेंट कारखाने में लगे टयूबवेल्स के कारण सरोवर का जलस्तर अपने निम्न स्तर पर पहुंच चुका है। सूत्रों के मुताबिक सरोवर के जल की सप्लाई मंदिर परिसर से सटे सिर्फ दो गांवों को इस शर्त पर दी गई थी कि स्थानीय प्रशासन सरोवर के पानी का स्तर बरकरार रखेगा।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सरोवर में 2007 तक पानी की कोई कमी नहीं थी, लेकिन उस वर्ष इलाके में तीन सीमेंट कारखाने आ गए। अब यही कारखाने सरोवर के लिए खतरा बन चुके हैं। शुरुआत में कारखाना प्रबंधन ने कहा था कि कारखाने के लिए झेलम नदी से पानी का बंदोबस्त किया जाएगा, लेकिन बाद में कारखाना प्रबंधन ने मंदिर के पास कई टयूबवेल लगा दिए, जिससे अब हिंदुओं के इस पवित्र सरोवर की दुर्गति हो चुकी है।


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