अब कश्मीर में कश्मीरी कर रहे हैं अलगाववादियों का विरोध, सड़कों पर उतरे लोग

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Updated on 7 Oct, 2016 at 3:54 pm

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कश्‍मीर में पिछले करीब तीन महीने से तनाव बना हुआ है। हिंसा का दौर अभी भी भी जारी है। ऐसे में तनाव के रहते हुए घाटी के लोगों के लिए जीवन गुजर-बसर करना मुश्किल हो रहा है।

हिजबुल मुजाहिद्दीन के कमांडर बुरहान वानी के मुठभेड़ में मारे जाने के बाद से हुर्रियत नेताओं ने कश्‍मीर बंद किया हुआ है, जिसके खिलाफ लोगों ने सड़कों पर आकर अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी के खिलाफ प्रदर्शन किया।

90 दिन के घाटी बंद के फरमान के साथ, स्थानीय लोगों का  रोजगार पूरी तरह ठप हो चुका है। कई घरों में खाने के लिए राशन तक नहीं बचा है।

स्थानीय लोगों में से एक ने कहा-


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“पिछले तीन महीनों से बंद की वजह से हमारी आजीविका पर असर पड़ रहा है, रोजी रोटी ठप हो गई है। हम अपने बच्चों की स्कूल फीस नहीं भर पा रहे हैं।”



आपको बता दे कि घाटी में तनाव इस कदर पसरा हुआ है कि स्थानीय दुकाने और स्कूलों को बंद कर दिया गया है।

स्थानीय लोगों ने हुर्रियत नेताओं की आलोचना करते हुए कहा कि ‘इन अलगाववादियों को हमारे घरों में देखना चाहिए। हमारे घरों में चूल्‍हे जलने बंद हो गए हैं। हम भुखमरी की कगार पर हैं और इन लोगों को अपनी नेतागिरी की पड़ी हुई है।’

इससे पहले राज्‍य की मुख्‍यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा था कि घाटी के  95 फीसदी लोग अमन-शांति चाहते हैं लेकिन, सिर्फ पांच फीसदी लोग ही ऐसे है जो हिंसात्मक गतिविधियों को बढ़ावा देने में तुले हुए हैं।


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