भगवान विष्णु की इस प्रतिमा के बारे में कहा जाता है कि यह 4 हजार साल पुरानी है

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Updated on 18 Jan, 2017 at 6:20 pm

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दक्षिण कश्मीर में पुरातत्ववेत्ताओं को भगवान विष्णु की ऐसी प्रतिमा मिली है, जिसके बारे में कहा जा रहा है कि यह कम से कम 4 हजार साल पुरानी है। इस प्रतिमा के साथ खोजकर्ताओं को कुछ स्वर्ण आभूषण भी मिले हैं।

बीजबिहाड़ा में मिली इस मूर्ति को फिलहाल पुलिस व पुरातत्ववेत्ताओं के संरक्षण में रखा गया है।

यह मूर्ति स्थानीय लोगों को पिछले दिनों झेलम दरिया के नजदीक स्थित समथन गांव में खुदाई के दौरान मिली थी। बाद में इसे पुलिस व पुरातत्ववेत्ताओं के संरक्षण में दे दिया गया।

भगवान विष्णु की इस प्रतिमा का एक हाथ नहीं है। इसके कान लंबे हैं साथ ही अाभुषणों से सुसज्जित भी। सिर पर एक मुकुट भी विराजमान है। जिस इलाके में यह मूर्ति मिली है, वहां पहले भी पुरातत्व महत्व की कई दुर्लभ मूर्तियां मिल चुकी हैं।, जिनमें भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी की प्रतिमाएं प्रमुख हैं।

आमतौर पर भारती इतिहास में इस स्थान का उल्लेख मुगल बादशाह जहांगीर से जोड़कर किया जाता है, लेकिन खनन में प्राप्त इन मूर्तियों के मिलने से यह साफ हुआ है कि कश्मीर में सनातन धर्म की जड़ें करीब 5 हजार साल पुरानी हैं। पुरातत्व समीक्षक मानते हैं कि प्राचीन काल में समथन गांव के नजदीक विजेश्वर नामक एक विश्वविद्यालय हुआ करता था। यहां भगवान गणेश तथा भगवान कार्तिकेय की प्रतिमाएं भी मिल चुकी हैं। इस स्थान पर पुरातत्व विभाग के विशेषज्ञ अक्सर खुदाई के लिए आते रहते हैं।



पिछले दिनों भगवान नरसिंह की यह प्रतिमा बारामूला से खुदाई के दौरान प्राप्त की गई थी। इस प्रतिमा को छठी शताब्दी का माना जाता है।

इसके अलावा बारामूला से कई शिवलिंग भी मिलते रहे हैं। इससे यह साबित होता है कि इस क्षेत्र में इस्लाम के आने से पहले कई महान मंदिर मौजूद रहे थे। साथ ही सनातन धर्म की व्यापक परंपरा भी। हालांकि, बाद में सिकंदर शाह मिरी और सिकंदर बुतशिकन जैसे कट्टर इस्लामिक आक्रान्ताओं ने हिन्दुओं के वैभव को क्रमशः नष्ट किया।

साभारः SUNO


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