जल्लीकट्टू पर जंग के बाद अब कर्नाटक में ‘कंबाला’, हटेगी रोक

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Updated on 29 Jan, 2017 at 4:07 pm

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तमिलनाडु सरकार द्वारा सांड के खेल जल्लीकट्टू को कानूनी रूप देने के लिए बिल लाने के बाद कर्नाटक में भैसों की पारंपरिक दौड़ ‘कंबाला’ को लेकर विरोध प्रदर्शन जारी हैं। कर्नाटक में प्रदर्शनकारी यह मांग कर रहे हैं कि कंबाला को भी जल्लीकट्टू की तरह से कानूनी रूप दिया जाए।

कंबाला के लिए बढ़ते प्रदर्शन को देख कर्नाटक की कैबिनेट ने रविवार को पशु पर निर्दयता विरोधी कानून में संशोधन करने का फैसला लिया है, ताकि इस पारंपरिक खेल को जलीकट्टू की ही तरह क़ानूनी जामा पहनाया जा सके।

गौरतलब है कि कंबाला एक ऐसा परंपरागत सालाना भैंस दौड़ है, जो कर्नाटक के तटीय जिलों में कीचड़ भरे खेतों में आयोजित की जाती है। इधर, राज्य के कानून एवं संसदीय कार्य मंत्री टी बी जयचंद्र ने यह जानकारी दी है कि कैबिनेट ने छह फरवरी से 10 फरवरी तक प्रस्तावित विधानसभा के सत्र में मसौदा विधेयक पेश करने का फैसला किया है। इसमें कंबाला और बैलगाड़ी की दौड़ की अनुमति दी जाएगी।


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बता दें कि कंबाला पर विवाद शुरू होने के बाद ही कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने प्रदर्शनकारियों को यह कह कर आश्वस्त करने की कोशिश की थी कि उनकी सरकार इस आयोजन की समर्थक है। चीफ जस्टिस एस. के.  मुखर्जी की अध्यक्षता वाली कर्नाटक हाई कोर्ट की एक डिविजन बेंच ने नवंबर 2016 के अपने अंतरिम आदेश में कंबाला के आयोजन पर रोक लगा दिया था। हालांकि, सरकार इसपर रोक हटाने का मन बना रही है, लेकिन इस मामले में 30 जनवरी को हाई कोर्ट से आदेश आना बाकी है।

प्रदर्शनकारियों का समूह कंबाला को हजारों साल से चलने वाला एक लोक उत्सव बताता है। उनका मानना है कि इस पारंपरिक खेल से लोग भावनात्मक रूप से जुड़े होते हैं। ऐसे में कंबाला की अनुमति पर सरकार की तरफ से रास्ता खुलता तो दिख रहा है, लेकिन हाई कोर्ट के फ़ैसले पर एक बार फिर सबकी निगाहें होंगी।

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