कर्नाटक के परिवार ने इस्लामिक हमलावरों द्वारा ध्वस्त किए गए 12वीं सदी के मंदिर को फिर बना दिया

author image
Updated on 29 Jul, 2017 at 9:21 am

Advertisement

पिछले सप्ताह कर्नाटक के हासन जिले में स्थित एक गांव में भगवान शिव के मंदिर में सैकड़ों श्रद्धालु जुटे। दरअसल, यह अवसर विशेष था। 12वीं सदी के इस मंदिर को इस्लामिक हमलावरों ने ध्वस्त कर दिया था। करीब 450 साल तक खंडहर के रूप में रहे इस मंदिर को एक बार फिर नए सिरे से बनाया गया है।

इस मंदिर को कर्नाटक के ही एक परिवार द्वारा नए सिरे से बनाया गया है। इसी परिवार के एक सदस्य उग्र ने इसके पुनर्निमाण से संबंधित तस्वीरें सोशल मीडिया पर पोस्ट की है।

यह मंदिर स्थित है शांतिग्राम नामक गांव में, जो हासन ने करीब 15 किलोमीटर दूर है। यह मंदिर NH 75 से बेहद नजदीक है।


Advertisement

उग्र लिखते हैंः

“इस मंदिर का निर्माण पहली बार 1123 ईस्वी में होइसला राजा विष्णुवर्धन ने करवाया था। इस मंदिर को 1566-1568 ईस्वी के बीच इस्लामिक हमलावरों ने तहस-नहस कर दिया।”

16वीं सदी वह दौर था जब उत्तर से होने वाले इस्लामिक हमलावरों के लगातार हमलों की वजह से दक्षिण के साम्राज्यों का पतन हो रहा था।

देश भर में इस्लामिक हमलावर मंदिरों को तहस-नहस कर रहे थे, मुर्तियों को खंडित कर रहे थे और मंदिरो परिसर को आग के हवाले कर रहे थे। मंदिरों की संपदाएं लू टी जा रही थी। यही सब इस शिव मंदिर के साथ भी हुआ था।

उग्र के परिजनों ने जब इस मंदिर का पुनर्निमाण शुरू किया तब यह मंदिर एक बार फिर आकार लेने लगा।

हमलावरों ने हालांकि, इस मंदिर को आग लगा दिया था, इसके बावजूद मंदिर की दीवारों पर उत्कीर्ण लेख अब भी पढ़े जा सकते हैं।

तमाम तोड़-फोड़ के बावजूद मंदिर की दीवारों पर उस दौर की आकृतियां अब भी बची हुईं हैं।



मंदिर का पुनर्निमाण कार्य शुरू हुआ वर्ष 2016 में। उग्र मानते हैं कि इस मंदिर का भले ही पुनर्निमाण किया गया है, लेकिन इसका पुराना वैभव लौटा पाना बेहद कठिन है।

12वीं सदी के एक मंदिर को इसके पुराने आकार में लाना इतना आसान नहीं है। यह न केवल बेहद खर्चीला काम है, बल्कि इसके लिए इन्जीनियरिंग का विशेष ज्ञान होना आवश्यक है।

सिर्फ मंदिर ही नहीं, मंदिर के प्रांगण में स्थित शिलालेख को भी संरक्षित करने की कोशिश की गई है।

पुनर्निर्माण के तहत गोपुरम तथा गर्भगृह को भी एक बार फिर से बनाया गया है।

उग्र लिखते हैं कि इस मंदिर में भगवान शिव की पूजा भगवान धर्मेश्वर के रूप में होती रही है। मंदिर के शिवलिंग को इस्लामिक हमलावरों ने दो टुकड़ों में तोड़ डाला था।

मंदिर के अंदर मौजूद नक्काशी को संरक्षित करने की कोशिश की गई है।

इस मंदिर को श्रद्धालुओं के लिए फरवरी महीने में खोला गया।

ये सारी तस्वीरें उग्र ने ट्वीटर पर प्रकाशित की हैं। आप यहां इसे देख सकते हैं।


Advertisement

आपके विचार


  • Advertisement