अभिनेता कमल हासन ‘जलीकट्टू’ के समर्थन में उतरे, जानिए क्यों

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Updated on 10 Jan, 2017 at 8:54 pm

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कमल हासन कई मुद्दों पर बेबाकी से अपनी बात रखने के लिए जाने जाते हैं। इस बार उन्होंने तमिलनाडु के परंपरागत खेल ‘जलीकट्टू’ के समर्थन में अपनी बात रखी है।

आपको बता दें कि वर्ष 2014 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा फसलों और खेती के उत्सव के दौरान खेले जाने वाले खेल ‘जलीकट्टू’ को प्रिवेंशन ऑफ क्रूअलटी टू ऐनिमल ऐक्ट के तहत बैन कर दिया गया था। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि इस खेल से जानवरों पर क्रूरता होती है।

इस प्रतिबन्ध पर कमल हासन ने अपनी बात रखते हुए कहा है कि जिन्हें भी लगता है कि यह खेल जानवरों के खिलाफ क्रूरता है, उन्हें बिरियानी पर भी प्रतिबन्ध लगा देना चाहिए।

आगे उन्होंने ऐनिमल ऐक्टिविस्ट पर तंज कसते हुए कहाः

“अगर ऐनिमल ऐक्टिविस्ट जलीकट्टू से इतने व्यथित हैं, तो उन्हें एक कदम और आगे जाना चाहिए और बिरयानी को भी प्रतिबन्धित करवा देना चाहिए। मैंने यह खेल खेला है। मैं कुछ उन गिने-चुने कलाकारों में से हूं, जो यह दावा कर सकते हैं कि उसने सांड को गले लगाया है। मैं एक तमिल हूं और इस खेल को पसंद करता हूं।”

जलीकट्टू 400 वर्ष से भी पुराना पारंपरिक खेल है, जो तमिलनाडु में जनवरी के महीने में फसल कटाई के त्योहार पोंगल पर आयोजित किया जाता है। इसमें सांड़ों की सींगों में सिक्के या नोट फंसाकर रखे जाते हैं और फिर उन्हें भड़काकर भीड़ में छोड़ दिया जाता है, ताकि लोग उन्हें सींगों से पकड़कर उन्हें काबू में कर सकें।

​कथित तौर पर पराक्रम से जुड़े इस खेल में विजेताओं को नकद इनाम दिया जाता रहा है। सांड़ों को भड़काने के लिए उन्हें शराब पिलाने से लेकर उनकी आंखों में मिर्च डाली जाती है और उनकी पूंछों को मरोड़ा तक जाता है, ताकि वे तेज दौड़ सकें।

वर्ष 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु में जलीकट्टू पर रोक लगा दी। केंद्र सरकार ने तमिलनाडु में पोंगल त्योहार पर जलीकट्टू को हरी झंडी दी थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस बारे में अंतिरम आदेश जारी कर कहा कि अब पोंगल त्योहार के दौरान यह खेल नहीं खेला जाएगा।

कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा था कि तमिलनाडु, महाराष्ट्र या देश में कहीं भी सांडों को जलीकट्टू में एक प्रदर्शन करने वाले पशु के रूप में या बैलगाड़ी दौड़ के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाएगा।


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कई बार जलीकट्टू खेल की तुलना स्पेन की बुलफाइटिंग से भी की जाती है। इस पर भी कमल हासन ने कहाः

“यह खेल सांड को रोकने के बारे में है, न कि उसके सींग तोड़कर या किसी अन्‍य तरह से उसे शारीरिक नुकसान से जुड़ा है। स्‍पेन में सांडों को नुकसान पहुंचाया जाता है और उन्‍हें मार दिया जाता है। तमिलनाडु में सांडों को देवता की तरह माना जाता है।”

कमल हासन पहले भी जलीकट्टू को फिर से शुरू करने की पैरवी कर चुके हैं।

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