कैलाश सत्यार्थी ने बचाया है हजारों बच्चों का बचपन, बाल मजदूरी के खिलाफ बुलंद की आवाज

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Updated on 11 Jan, 2017 at 2:03 pm

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मासूमों के बचपन को बचाने के अपने अभियान में लगे नोबेल शांति पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी ने बच्चों के हित में अपनी आवाज बुलंद की है।

मध्य प्रदेश के विदिशा जिले में 11 जनवरी, 1954 को जन्मे कैलाश सत्यार्थी ने इंजीनियर की अपनी नौकरी छोड़कर, पूरा जीवन बच्चों के अधिकारों में लगाने का निर्णय किया।

बचपन से ही समाजसेवा का भाव लिए कैलाश सत्यार्थी ने ‘संघर्ष जारी रहेगा’ नामक पत्रिका की शुरूआत की। इस पत्रिका के जरिए उन्होंने बंधुआ मजदूरों के दर्द को आवाज दी।

1980 में बचपन बचाओ आंदोलन की नींव रखने वाले कैलाश सत्यार्थी ने ‘बंधुआ मुक्ति मोर्चा’ का गठन किया।  यह मोर्चा देशभर के कई हिस्सों मे बाल मजदूरी कर रहे बच्चों को इस अभिशाप से मुक्त कराता है।

63 वर्षीय कैलाश सत्यार्थी अब तक 144 देशों के 83 हजार बच्चों को बाल मजदूरी की अंधकारी खाई से बचा चुके हैं।

उन्होंने बाल श्रम के खिलाफ वैश्विक मार्च की शुरुआत की, जिसने इंटरनेशनल लेबर आर्गेनाईजेशन के कन्वेंशन 182 का मसौदा पेश किया।

कैलाश सत्यार्थी को कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है, जिसमें साल 2014 में पाकिस्तान की मलाला यूसुफजई के साथ मिला नोबेल शांति पुरस्कार भी शामिल है।


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