इतिहासकारों ने ईसा मसीह के वजूद पर खड़े किए सवाल, कहा- विश्वसनीय साक्ष्य नहीं !

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Updated on 26 Jun, 2017 at 3:21 pm

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क्या ईसा मसीह ईश्वर हैं? क्या उनका कोई अस्तित्व था ? ये ऐसे सवाल हैं जो अब कई इतिहासकार और ब्लॉगर्स उठा रहे हैं।

दुनियाभर में इसाई धर्म के अनुयायी ईसा मसीह यानी कि जीज़स क्राइस्ट को ईश्वर का पुत्र मान उन्हें पूजते हैं। अगर यहूदी और इस्लाम धर्म की बात करें तो इनमें ईसा मसीह को पैगम्बर बताया गया है। ईसा मसीह से जुड़ा इतिहास जो हम किताबों में पढ़ते आए हैं, वो उन्हें एक ऐतिहासिक व्यक्तित्व का दर्जा देता है।

लेकिन अब इसी ऐतिहासिक व्यक्तित्व के अस्तित्व पर कई इतिहासकारों ने उंगली उठाई है। उनका मानना है कि ईसा मसीह नाम का कोई शख्स शायद कभी पैदा ही नहीं हुआ था। यह मात्र अफवाह भर है।

इस विषय को कई लेखकों ने अपनी किताब में अलग नजरिए से सामने रखा है। मशहूर लेखक रेजा असलान की किताब ‘ज़ेलट’, डेविड फिट्सजेरलेड की लिखी ‘नेल्ड: टेन क्रिस्चन मिथ्स दैट शो जीज़स नेवर एक्जिस्टड ऐट ऑल’ और बार्ट ऐरमन की लिखी ‘हाऊ जीज़स बिकेम गॉड’ ईसा मसीह के अस्तित्व के मुद्दे पर प्रकाश डालती हैं। इसके इलावा कई और किताबें हैं जो ईसा मसीह के वजूद पर सवाल खड़ा करती हैं।


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इन इतिहासकारों का मानना है कि ईसा मसीह को लेकर कोई विश्वसनीय ऐतिहासिक साक्ष्य मौजूद नहीं हैं।

ईसा मसीह को लेकर जो कुछ भी विवरण मिलते हैं, वो उनकी मृत्यु के कई वर्षों बाद सुनी सुनाई बातों के आधार पर है, जिन्हें  पुख्ता प्रमाण नहीं माना जा सकता।



वहीं इतिहासकार अपनी इस बात को बल अपनी इस कथनी से देते हैं कि ईसाई धर्म के पवित्र धर्मग्रंथ ‘बाइबल’ में ही ईसा मसीह के 12 साल से लेकर 30 साल की उम्र तक का कोई विवरण नहीं है।

33 साल की उम्र में सूली पर चढ़ा दिए गए ईसा मसीह के जीवन के कई सालों का जिक्र न होना, इतिहासकारों को अखरता है।

ज्यादातर इतिहासकार इस बात की गुंजाइश भी रखते हैं कि किसी विशेष शख्स से प्रभावित होकर उसके बारे में मिथक गढ़े होंगे। ईसा मसीह के चरित्र को प्राचीन पौराणिक कथायों से प्रेरित भी बताया गया है, जिसके समय के साथ रहते मिथक का रूप ले लेने के आसार हैं। हालांकि, इतिहासकार जो विवरण सामने रख रहे हैं उससे  भी किसी साक्ष्य पर नहीं पहुंचा जा सकता।


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स्रोत: NBT

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