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शंकराचार्य स्वामी जयेंद्र सरस्वती परमब्रह्म में लीन, समाज के प्रति रहा अप्रतिम योगदान

Published on 1 March, 2018 at 2:15 pm By

कांची कामकोटि पीठ के प्रमुख श्री श्री शंकराचार्य स्वामी जयेन्द्र सरस्वती आध्यात्मिक एकता की मिसाल कायम करने वाले संत रहे हैं। सनातन धर्म के सर्वोच्च धर्मगुरु रहते हुए उन्होंने समाज के वंचितों को न सिर्फ मुख्यधारा से जोड़ने का काम किया, बल्कि उनका सहारा भी बने। ऐसे पुण्यात्मा का चले जाना समाज की बड़ी क्षति है।


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तमिलनाडु के कांचीपुरम में शंकराचार्य स्वामी जयेन्द्र सरस्वती बुधवार को परमब्रह्म में लीन हो गए। वह 82 वर्ष के थे।

 

 

शंकराचार्य स्वामी जयेन्द्र सरस्वती भारत में हिन्दू धर्म के पुनर्जागरण के प्रवर्तकों में एक रहे। धर्म, समाज तथा शिक्षा-स्वास्थ्य के क्षेत्र में उनका योगदान अप्रतिम रहा है। वह समाज में व्याप्त छुआछूत, भेदभाव और जातिवाद को जड़ से नष्ट करने के लिए हमेशा सजग रहे।

 


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आज दक्षिण भारत के प्रदेशों में मंदिरों की स्वच्छता तथा सभी वर्गों के पुजारियों की भागीदारी इन्हीं के प्रयास का प्रतिफल है। इन्होंने श्री तंत्र विद्यापीठम की स्थापना की, जिसके माध्यम से सभी जाति-वर्गों के लोगों को कर्मकांड का प्रशिक्षण दिया जाता है।

सुलभ स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम करते हुए इन्होंने चाइल्ड हॉस्पिटल, शंकर नेत्रालय आदि की स्थापना की। इनकी शाखाएं दक्षिण भारत से लेकर सुदूर उत्तर और उत्तर-पूर्व भारत में हैं। इनका मानना था कि देश भर में समाज को जोड़ने के लिए अस्पताल और स्कूल खोले जाएं। साथ ही धार्मिक चेतना के प्रसार हेतु मंदिर बनाए जाएं।

 



 

इनके इन्हीं दृष्टिकोण और जबरदस्त कार्य पद्धति से ईसाई मिशनरियों ने इन्हें निशाने पर लिया। साथ ही कुछेक राजनेताओं को भी इनसे ख़तरा उत्पन्न हो गया। फलतः साजिश और झूठे आरोपों के तहत इन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। हालांकि कोर्ट ने इन्हें छोड़ने के आदेश दिए और आरोपों से मुक्त कर दिया। क़ानून-प्रशासन के कार्यों का इन्होंने कोई विरोध दर्ज नहीं किया।

 

 

भूतपूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने अपनी किताब ‘द कोएलिशन इयर्स’ में लिखा है कि पूज्य शंकराचार्य जी के साथ हुए अन्याय और दुर्व्यवहार से उन्हें बहुत बुरा लगा था। 2004 में उन्होंने मनमोहन कैबिनेट की मीटिंग में भी जोरशोर से इस मुद्दे को उठाया था। श्री मुखर्जी ने स्पष्ट कहा था कि भारत में धर्मनिरपेक्षता दिखाने के लिए हिन्दुओं का अपमान कतई नहीं किया जाना चाहिए।

 

शंकराचार्य स्वामी जयेन्द्र सरस्वती अयोध्या में राम मंदिर निर्माण हेतु बाबरी मस्जिद एक्शन कमिटी और विश्व हिंदू परिषद के बीच मध्यस्थ बने और वाजपेयी सरकार से कई दौर की बातचीत की, लेकिन देश के विपक्षी राजनीतिक हलकों को ये बर्दाश्त न हुआ।

 

 

स्वामी जयेन्द्र सरस्वती को शंकराचार्य पद को आम समाज से जोड़ने के लिए सदा याद किया जाएगा। ये आद्य शंकराचार्यजी द्वारा स्थापित कांची पीठ के गुरु होने के नाते सनातन वैदिक हिन्दू धर्म के सर्वोच्च धर्मगुरु थे। स्वामी विजयेन्द्र सरस्वती को इन्होंने अपना उत्तराधिकारी घोषित किया था।

 

 


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इस महान धर्मसाधक समाज सुधारक पूज्य शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती जी को हमारी ओर से विनम्र श्रद्धांजलि।

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