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जामिनी रॉय: एक ऐसा महान चित्रकार, जिन्होंने चित्रकारी को दिया नया आयाम

Updated on 20 April, 2019 at 4:21 pm By

हमारे देश में बहुत से माहन चित्रकार हुए हैं और उन्हीं में से एक है जामिनी रॉय (Jamini Roy) , लेकिन वो बाकी चित्रकारों से इस मायने में अलग है क्योंकि उन्होंने चित्रकारी की परंपरागत शैली अपनाने की बजाय अपनी शैली बनाई। यही नहीं, वो उस दौर में भी मशहूर हुए जब चित्रकारों को आज जैसी इज्ज़त नहीं मिलती थी। चलिए, आपको बताते हैं भारत के इस महान चित्रकार से जीवन से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें।


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जामिनी रॉय (Jamini Roy) की गिनती आधुनिक कलाकारों में होती है, क्योंकि उनकी सोच अपने समय से काफ़ी आगे की थी। 1887 में जन्में जामिनी रॉय ने महान चित्रकार अबनिन्द्रनाथ टैगोर से कला की शिक्षा ली।

 

जामिनी रॉय पेंटिंग (Jamini Roy)

 

रॉय ने यूरोपियन आर्ट की क्लासिक परंपरा की शैली की बजाय आदिवासी कला से चित्रों को बनाना शुरू किया। उन्होंने चटाई, कपड़े और लकड़ी पर भी चित्रकारी की। उन पर ‘कालीघाट पाट स्टाइल’ का बहुत असर था, जिसमें मोटे ब्रश स्ट्रोक का इस्तेमाल होता था।

रॉय ने एशियाई शैली, पक्की मिट्टी से बने मंदिरों की कला, लोक कलाओं की वस्तुओं और शिल्प परम्पराओं से प्रेरणा ली। उनके चित्रों में गांव के दृश्य, जानवर और खुशहाल लोग दिखते थे। रॉय ने संथाल महिलाओं के पोर्ट्रेट भी बनाए, जिसमें उन्होंने नई उभरती शैली का प्रयोग किया।


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जामिनी रॉय (Jamini Roy Biography)

 

आसपास की घटनाओं और लोगों का चित्रण करने के साथ ही उन्होंने रामायण, महाभारत जैसे धार्मिक ग्रंथों की घटनाओं को भी कैनवस पर उतारा। कृष्ण लीला का उनका चित्रण बहुत मशहूर हुआ था।

रॉय सभी धर्म का सम्मान करते थे, तभी तो हिंदू देवी-देवताओं के साथ ही उनकी कला में ईसाई धर्म को भी जगह दी गई। उन्होंने अपने समय में ईसाई धर्म से जुड़ी पौराणिक कथाओं का चित्रण भी बहुत ही खूबसूरती से किया।

 



जामिनी रॉय (Jamini Roy)

 

जामिनी रॉय (Jamini Roy) की मशहूर कलाकृतियों में क्वीन ऑन टाइगर, कृष्णा एंड बलराम, गोपिनी, वर्जिन एंड चाइल्ड, वॉरियर किंग आदि शामिल हैं। रॉय की खासियत थी भारतीय संस्कृति से उनका प्यार, तभी तो अपनी कला में वो पश्चिमी कैनवास, पेंट का इस्तेमाल नहीं करते थे।

रॉय ने कला को कभी पैसों में नहीं तौला। अगर उन्हें पता चलता कि उनकी पेंटिंग खरीदने वाला कोई शख्स अगर पेंटिंग की ठीक से देखभाल नहीं कर रहा है, तो वो उसे दोबारा खरीद लेते थे।

 

जामिनी रॉय (Jamini Roy's Life)

 

उनकी कला की प्रदर्शनी पहली बार सन् 1938 में कोलकाता के ‘ब्रिटिश इंडिया स्ट्रीट’ पर लगी थी। 1940 के दशक में वो बंगाल के मीडिल क्लास लोगों और यूरोपिय समुदाय में बहुत मशहूर हो गए थे।

जामिनी रॉय को उनके बेहतरीन काम के लिए भारत सरकार ने 1955 में पद्मभूषण से सम्मानित किया था। 24 अप्रैल 1972 को रॉय दुनिया को अलविदा कह गए। उनकी मौत के 4 साल बाद सरकार ने उन्हें उन 9 मास्टर्स में शामिल कर लिया, जिनके काम को राष्ट्रीय धरोहर माना गया।

 

जामिनी रॉय (Jamini Roy)

 


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वहीं, रॉय को उनके ‘मदर हेल्पिंग द चाइल्ड टु क्रॉस ए पूल’ चित्र के लिए 1934 में वाइसरॉय का स्वर्ण पदक मिला था। जामिनी रॉय भारत के महान चित्रकारों में से एक थे। उन्हें 20वीं शताब्दी के महत्‍वपूर्ण आधुनिकतावादी कलाकारों में एक माना जाता है।

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