ब्राह्मण होने के बावजूद दफनाई गईं जयललिता, ये थी इसकी वजह

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Updated on 7 Dec, 2016 at 12:42 pm

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तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री दिवगंत जे जयललिता को राजनीति में उनके समझे जाने वाले मेंटर एमजीआर की मरीना बीच पर स्थित स्मारक के बगल में दफनाया गया। जयललिता ने 5 दिसम्बर की रात 11:30 बजे चेन्नई के अपोलो अस्पताल में अंतिम सांसें ली थीं।

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कई लोगों के जेहन में सवाल है कि जयललिता जो एक ब्राह्मण परिवार से ताल्लुक रखती हैं, साथ ही नियमित रूप से प्रार्थना करने वाली और माथे पर अक्‍सर आयंगर नमम  (खास तरह का टीका) लगाने वाली जयललिता को दफनाने का फैसला सरकार और उनकी करीबी श‍‍शिकला ने क्‍यों लिया, जबकि आयंगरों में दाह संस्‍कार की ही परंपरा है। दिवगंत जयललिता को दफनाने के पीछे की वजह इस तरह है:

पहली वजह:

दिवगंत जयललिता के दाह संस्कार के बजाय उन्हें दफनाने के निर्णय पर एक वरिष्‍ठ सरकारी सचिव ने बतायाः

“वह हमारे लिए आयंगर नहीं थीं। वह किसी जाति और धार्मिक पहचान से परे थीं। यहां तक कि पेरियार, अन्‍ना दुरई और एमजीआर जैसे ज्‍यादातर द्रविड़ नेता दफनाए गए थे और हमारे पास उनके शरीर का दाह-संस्‍कार करने की कोई मिसाल नहीं है। तो हम उन्‍हें चंदन और गुलाब जल के साथ दफनाते हैं।”


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दूसरी वजह:

पूर्व नेताओं को दफनाए जाने से समर्थकों में एक स्‍मारक के रूप में उन नेताओं की स्मृति रहेगी।

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तीसरी वजह:

द्रविड़ आंदोलन के नेता नास्तिक होते हैं, जो सैद्धांतिक रूप से भगवान और समान प्रतीकों को नहीं मानते।

यहां पर यह है कि दिवगंत जयललिता ईश्वर पर विश्वास रखती थीं, लेकिन उनका कोई अपना सगा रिश्तेदार नहीं था जो उनका दाह संस्कार कर सकें। एक वरिष्ठ राजनितिक विश्लेषक कहते हैं:

“चूंकि, वह विश्‍वास रखती थीं, यह तय है कि लोग मृत्‍यु के बाद उन्‍हें दफनाने की ही बात करेंगे। लेकिन उन्‍हें दाह संस्‍कार के लिए एक सगा रिश्‍तेदार चाहिए। जयललिता के परिवार में सिर्फ सगी भतीजी दीपा जयाकुमार (ज‍यललिता के स्‍वर्गवासी भाई, जयाकुमार की बेटी) हैं। यह भी साफ है कि शशिकला के नजदीकी दीपा को किसी तरह से भी अंतिम संस्‍कार जुलूस के आस-पास फटकने नहीं देगा, क्‍योंकि इससे चुनौती पैदा होगी।”


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