एक साथ 31 सैटलाइट्स लॉन्च कर ISRO ने फिर बनाया इतिहास

Updated on 23 Jun, 2017 at 11:40 am

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इसरो अंतरिक्ष के क्षेत्र में लगातार नए मुकाम हासिल कर रहा है। भारत अंतरिक्ष शोध के मामले में मजबूत हो रहा है। इसरो ने आज श्रीहरिकोटा स्थित लॉन्चपैड से कार्टोसैट-2s सैटलाइट के साथ 30 नैनो सैटलाइट्स को PSLV-C38 लॉन्च वीइकल से छोड़ा। लॉन्च के वक्त इसरो के चेयरमैन एएस किरन कुमार ने साथी वैज्ञानिकों को बधाई दी। इस लॉन्च के साथ ही इसरो की ओर से कुल स्पेसक्राफ्ट मिशन की संख्या 90 हो गई।

इन उपग्रहों को धरती पर नजर रखने के लिए लॉन्च किया गया है। सभी उपग्रहों का कुल वजन करीब 955 किलोग्राम है। साथ भेजे जा रहे इन उपग्रहों में भारत के अलावा ऑस्ट्रिया, बेल्जियम, चिली, चेक गणराज्य, फिनलैंड, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, ब्रिटेन और अमेरिका समेत 14 देशों के नैनो उपग्रह शामिल हैं। 29 विदेशी, जबकि एक नैनो सैटलाइट भारत का है।


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प्रक्षेपण के बाद वैज्ञानिकों के लिए चुनौतियां भी हैं। इन अंतरिक्ष यानों को स्पेस में घूम रहे मलबों से टकराने से रोकना एजेंसी की सर्वोच्च प्राथमिकता है। यह मलबा पुराने खराब हो चुके सैटलाइट्स, रॉकेट के हिस्से, अंतरिक्ष यान के विभिन्न चरणों के लॉन्च के दौरान अलग हुए टुकड़े आदि होता है। अंतरिक्ष में तैरते ये मलबे बेहद खतरनाक होते हैं। ये इतने छोटे या नुकीले होते हैं, जो सैटलाइट्स, अंतरिक्ष यानों और यहां तक कि स्पेस स्टेशनों तक के लिए बेहद खतरनाक होते हैं।

भारतीय एजेंसी अंतरराष्ट्रीय इंटर एजेंसी स्पेस डेबरीज कोऑर्डिनेशन कमिटी (IADC) का सदस्य है। यह कमिटी मानव निर्मित और प्राकृतिक अंतरिक्ष मलबे को कम करने की दिशा में काम करती है। इसका मकसद एजेंसियों के बीच मलबों से जुड़ी जानकारी का आदान-प्रदान सहित जरूरी रिसर्च को बढ़ावा देना है। भारत जिस तरह एक लॉन्च में कई सैटलाइट्स छोड़ रहा है, इससे भी स्पेस में मलबे की तादाद कम हो रही है।

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