‘इशरत जहां मामले में एफिडेविट पर साइन करने के लिए मुझे सिगरेट से दागा गया’

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Updated on 2 Mar, 2016 at 12:16 am

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इशरत जहां एनकाउन्टर मामले में एक के बाद एक सनसनीखेज खुलासे हो रहे हैं। आंतरिक सुरक्षा विभाग के अंतरिम सेकरेटरी रहे आरवीएस मणि ने कुछ ऐसे सनसनीखेज दावे किए हैं, जिससे पिछली यूपीए सरकार कठघरे में खड़ी दिखाई दे रही है और उसकी भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

मणि ने कहा है कि दूसरे एफिडेविट पर साइन करने के लिए उन पर दबाव बनाया गया था। इसके लिए उन्हें सिगरेट से दाग कर प्रताड़ित किया गया था। उन्होंने कहा कि सीबीआई की एक महिला अधिकारी उनके पीछे पड़ गई थी। उनका पूरा परिवार खौफ में जी रहा था।

गौरतलब है कि इससे पहले यूपीए सरकार में होम सेक्रेटरी रहे जीके पिल्लई ने कहा था कि इशरत जहां एनकाउन्टर से जुड़े एफिडेविट में चिदंबरम ने उन्हें दरकिनार करते हुए खुद बदलाव करवाया था। उन्होंने कहा कि चिदंबरम ने आईबी में उनके कनिष्ठ अधिकारियों को कॉल किया और एफिडेविट को पूरी तरह बदल दिया। पिल्लई के मुताबिक, चिदम्बरम खुद बोल कर नया एफिडेविट लिखवा रहे थे। इसलिए किसी ने कोई विरोध नहीं किया।

इस पर सफाई देते हुए चिदम्बरम ने भी यह माना था कि एफिडेविट बदला गया था, लेकिन ऐसा इसलिए किया गया था, क्योंकि पहला एफिडेविट भ्रम फैलाने वाला था। उन्होंने कहा कि ऐसा किसी को बचाने के लिए नहीं किया गया था बल्कि इस मामले में केंद्र सरकार का पक्ष ठीक से रखने के लिए किया गया था।



एक के बाद एक वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा किए गए सनसनीखेज खुलासे के बाद कांग्रेस पार्टी भाजपा के निशाने पर आ गई है।


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गौरतलब है कि लश्कर-ए-तोएबा के आतंकवादी डेविड कोलमैन हेडली की गवाही के बाद इशरत जहां का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है।

इशरत जहां, जावेद शेख, अमजद राणा जीशान जौहर नाम के चार कथित आतंकियों को अहमदाबाद में हुए एक एनकाउन्टर में मार गिराया गया था। यह एनकाउन्टर अहमदाबाद पुलिस और आईबी ने मिलकर किया था।

गुजरात पुलिस और केन्द्रीय सुरक्षा एजेन्सियों ने खुलासा किया था कि ये सभी लश्कर-ए-तोएबा के आतंकवादी थे और गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी की हत्या करने आए थे। वहीं, कांग्रेस ने गुजरात सरकार पर फर्जी एनकाउन्टर का आरोप लगाया था।


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