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जिस कोच को भारत ने हटाया, उसने ईरान की महिला कबड्डी टीम को बना दिया एशिया का चैंपियन

Updated on 28 August, 2018 at 4:30 pm By

एशियाई खेलों में ईरान की महिला टीम ने कबड्डी में भारत को हराकर गोल्ड जीता। इस जीत में पूर्व भारतीय कोच शैलजा जैनेंद्र कुमार जैन का बहुत बड़ा योगदान रहा। मौजूदा समय में शैलजा ईरान की टीम की कोच हैं। लेकिन 18 महीने पहले तक वह भारतीय महिला टीम की कोच हुआ करती थीं।


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जी हां, करीबन डेढ़ साल पहले तक शैलजा भारतीय महिला कबड्डी टीम की कोच थी, लेकिन उन्हें कबड्डी फेडरेशन ने निकाल दिया था। इस बात का खुलासा उन्होंने खुद इंडियन एक्सप्रेस को दिए गए अपने एक इंटरव्यू में किया। शैलजा ने बताया कि उन्हें बिना कोई कारण बताए कोच के पद से निकाल दिया गया था।

 

शैलजा ने आगे कहा कि भारतीय महिला कबड्डी टीम के कोच पद से इस्तीफा देने के बाद वो अपने आप को साबित करने के लिए ईरान की टीम के साथ बतौर कोच जुड़ी।

 

 

शैलजा ने ईरान और भारत के मुकाबले को लेकर कहा कि एक भारतीय होने के नाते उन्हें दुख है कि भारतीय टीम इस बार गोल्ड हासिल नहीं कर सकी, लेकिन बतौर कोच ईरान के लिए वह बेहद खुश हूं।


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दो बार की चैंपियन भारतीय महिला कबड्डी टीम एशियाई खेलों में 24-27 से ईरान से पराजित हो गई और उसे रजत पदक से संतोष करना पड़ा।



 

ईरान की महिला कबड्डी टीम को इस मुकाम तक पहुंचाने के लिए शैलजा ने ईरानी खिलाड़ियों पर काफी मेहनत की है। उन्होंने टीम की दिनचर्या में योग, प्राणायाम को शामिल किया। ईरान टीम से जुड़ने को लेकर शैलजा ने बताया-

 

“जब ईरान की टीम का प्रस्ताव मेरे सामने आया तो मैंने इसे चुनौती की तरह लिया। शुरुआत में मुझे कुछ समस्या हुई, क्योंकि मैं शाकाहारी थी और भाषा भी समस्या थी। फिर मैंने थोड़ी फारसी सीखी और अब ये काम आसान हो गया है।”

 

अपनी टीम से लगाव को लेकर शैलजा बताती हैं-

 

“मैच या अभ्यास से पहले टीम मैट को माथे से लगाती हैं। उन्होंने ये आदत अपना ली है। इसमें कोई धार्मिक नजरिया नहीं है। वे ऐसा सम्मान देने के लिए करती हैं। मैं भी ग्राउंड में जाने से पहले उसे माथे से लगाती हूं। ये उसके प्रति सम्मान जताने के लिए होता, जिसने हमें जीवन में सबकुछ दिया। इन लड़कियों ने ये मुझसे ही सीखा और अब वे भी ऐसा ही करती हैं।”

 

 


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बताते चले कि नागपुर में जन्मीं शैलजा अपनी मां को कबड्डी खेलते देख बड़ी हुई थी। नेशनल लेवल पर खेलने के दौरान उन्हें जलगांव में रह रहे एक व्यक्ति की तरफ से शादी के लिए प्रस्ताव आया लेकिन उन्होंने कबड्डी को चुना और साल 1980 में शादी की।

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