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बिना हिजाब के शतरंज खेलने वाली चैम्पियन को दंडित करेगा ईरान, लगाया प्रतिबंध

Published on 22 February, 2017 at 4:17 pm By

पिछले दिनों अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के खिलाफ महिला अधिकारों की समर्थक महिलाओं ने रैली का आयोजन किया था। उस रैली के दौरान ये पोस्टर छाए रहे थे, जो अमेरिका में महिलाओं के लिए हिजाब की कवायद करते हैं।

यह तस्वीर दरअसल क्वीन्स में रहने वाली मुनीरा अहमद की है, जो अमेरिका में रहने वाली मुस्लिम महिलाओं की आजादी का प्रतीक बन कर उभरी हैं।

यह तस्वीर क्वीन्स में रहने वाली मुनीरा अहमद की है, जो अमेरिका में रहने वाली मुस्लिम महिलाओं की आजादी का प्रतीक बन कर उभरी हैं।


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डोनाल्ड ट्रम्प के खिलाफ अमेरिका ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के तथाकथित लिबरल और सेक्युलर आबादी इस तस्वीर को एक प्रतीक के रूप में इस्तेमाल कर रही है। इस तस्वीर के जरिए यह प्रचारित किया जा रहा है कि मुनीरा अहमद महिला अधिकार और आजादी का प्रतीक है। वह हिजाब पहनती है और यह इस बात का द्योतक है कि मुस्लिम महिलाओं को कैसा दिखना चाहिए। लिबरल्स को लगता है कि हिजाब, नकाब, बुर्का सही मायने में महिला सशक्तिकरण का एक तरीका है। संभवतः यही वजह है कि 19 फरवरी को जो कुछ ईरान में हुआ, उसके खिलाफ कोई आवाज नहीं उठी है।

दरअसल, ईरान ने हिजाब पहन कर नहीं खेलने के आरोप में देश की शतरंज खिलाड़ी डोरसा डी. को प्रतिबंधित कर दिया है।

शतरंज खिलाड़ी बोरना और डोरसा।

डोरसा पर आरोप है कि स्पेन में खेले गए ट्रेडवाइज जिब्राल्टर चेस फेस्टिवल में उसने हिजाब नहीं पहना था। वह शतरंज में अंडर-18 विश्व चैम्पियन है। माना जा रहा है कि ईरान का इस्लामिक प्रशासन डोरसा और उसके भाई पर कड़ी कार्रवाई करेगा। डोरसा के 15 वर्षीय भाई बोरना पर आरोप है उसने इजराइली खिलाड़ी के खिलाफ खेलने की हामी भरी थी।

कजाखस्तान के खिलाड़ी के खिलाफ बोरना।



मीडिया रिपोर्ट्स में ईरान चेस फाउन्डेशन के मुख्य मेहरदाद पहलेवनजादेह के हवाले से बताया गया है कि ईरानी प्रशासन इन दोनों भाई-बहनों से कड़ाई से पेश आएगा।

मेहरदाद पहलेवनजादेह कहते हैंः

“पहले चरण में ये दोनों भाई-बहन ईरान में होने वाले किसी खेल में हिस्सा नहीं ले सकेंगे। साथ ही उन्हें राष्ट्रीय टीम मेंं भी नहीं लिया जाएगा।”

फिलहाल 18 वर्षीया डोरसा स्पेन में पढ़ाई-लिखाई कर रही है।

एक गेम के दौरान डोरसा।


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इन दोनों भाई-बहनों ने इस चैम्पियनशिप में स्वतंत्र रूप से हिस्सा लिया था। अधिकारियों का भी मानना है कि ये दोनों ट्रेडवाइज जिब्राल्टर चेस फेस्टिवल में ईरान का प्रतिनिधित्व नहीं कर रहे थे, इसके बावजूद सरकार उन पर कार्रवाई करने के लिए बाध्य है, क्योंकि उन्होंने वर्ष 1979 में इस्लामिक क्रान्ति के बाद महिलाओं के लिए बने कानून का पालन नहीं किया है।

इस्लामिक क्रान्ति के बाद हजारों की संख्या में महिलाएं बुरका, हिजाब और नकाब के खिलाफ सड़कों पर उतर गईं थीं।

ईरान में इस्लामिक क्रान्ति के बाद बुरका, निकाब और हिजाब के खिलाफ सड़कों पर हजारों महिलाएं उतर गईं।

इन महिलाओं ने अपने स्तर पर संघर्ष किया, लेकिन उन्हें तथाकथित धर्मनिरपेक्षता के चैम्पियन्स और लिबरल्स का समर्थन नहीं मिला।


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डोरसा और उसके भाई बोरना के मामले में मान लेना चाहिए कि उनके समर्थन में आवाजें कम ही उठेंगी।

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