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भारतीय युवाओं ने 2017 में किए ये शानदार आविष्कार, जानकर आपको गर्व होगा

Published on 17 November, 2017 at 11:21 am By

नेत्रहीनों के लिए चश्मा (गॉगल) बनाने से लेकर दुनिया का सबसे छोटा सैटेलाइट बनाने जैसे कई शानदार आविष्कार किए हैं, हमारे देश के युवाओं ने। ज़ाहिर है उनकी इस उपलब्धि पर देश को गर्व है। चलिए एक नज़र डालते हैं देश को गौरवान्वित करने वाले कुछ ऐसे ही आविष्कारों पर।

1. मधुमखियों की सुरक्षा करने वाला रोबोट


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दिल्ली पब्लिक स्कूल की सातवीं कक्षा की छात्रा काव्या विघ्नेश अपने साथ के बाकी बच्चों से काफी अलग हैं। काव्या ने ऐसा रोबोट बनाया है, जो मधुमक्खियों की हिफाज़त करेगा। दरअसल, काव्या ने ऐसा रोबोट बनाया है, जो शहद बनाने वाली मधुमक्खियों को उनके छत्ते से बिना कोई हानि पहुंचाए हटा देगा। काव्या की रोबोटिक्स के क्षेत्र में दिलचस्पी है। वो रोबोटिक्स के क्षेत्र में आयोजित दुनिया की प्रतिष्ठित प्रतिस्पर्धा ‘फर्स्ट लेगो लीग’ के लिए क्वालिफाई करने वाली भारत की सबसे युवा टीम की सदस्य हैं।

2. नेत्रहीनों के लिए चश्मा

अरुणाचल प्रदेश के 11वीं के एक छात्र अनंग तदार ने अनोखा चश्मा बनाया है, जिसे लगाने के बाद नेत्रहीनों को स्टिक ज़रूरत नहीं पड़ेगी। अनंग ने पार्किंग सेंसर तकनीक का इस्तेमाल करके चश्मा बनाया है। इस चश्मे को G4B (गॉगल फॉर ब्लाइंड) नाम दिया है। अनंग के मुताबिक, जिस तरह कारों में पार्किंग सेंसर तकनीक का उपयोग किया जाता है, उसी आधार पर इस चश्मे को भी तैयार किया गया है। जैसे ही कोई बड़ी चीज़ इस चश्मे के पास आएगी, इसकी बीप ऑन हो जाएगी और व्यक्ति सर्तक हो जाएगा। वाकई उनका ये आविष्कार नेत्रहीनों के लिए फायदेमंद साबित होगा। अनंग के इस आविष्कार से यूनीसेफ भी हैरान है।

3. एनर्जी सेविंग कार



इंदिरा गांधी दिल्ली तकनीकी विश्वविद्यालय की टीम पंथेरा की 15 छात्रोंओं ने मिलकर एनर्जी सेविंग कार बनाई है। टीम की कैप्टन और ड्राइवर मनुप्रिया वत्स के मुताबिक, गाड़ियों की वजह से ही ज़्यादा प्रदूषण होता है, इसलिए हमने ऐसी कार बनाने के बारे में सोचा जो बिना पेट्रोल के भी अच्छा माइलेज दे। एक अखबार की खबर के मुताबिक एनर्जी सेविंग कार Iris 2.0 सिंगर सीटर है और इसमें तीन पहिए हैं।

4. विश्व का सबसे छोटा सैटेलाइट

तमिलनाडू के 18 वर्षीय रिफत और उसकी टीम ने दुनिया का सबसे छोटा और हल्का सेटेलाइट बनाकर सभी को चौंका दिया। इस सैटेलाइट का वजन सिर्फ़ 64 ग्राम है। इतना ही नहीं, इस सेटेलाइट को अमेरिका स्थित दुनिया की सबसे बड़ी अंतरिक्ष ऐजेंसी नासा ने 21 जून को लॉन्च भी कर दिया हैं। सैटेलाइट का नाम भारत के पूर्व राष्ट्रपति और वैज्ञानिक एपीजे अब्दुल कलाम के नाम पर कलाम सैट रखा गया। इस सैटेलाइट को बनाने में रिफत और उसकी पूरी टीम को 2 साल का समय लगा और इस पर करीब एक लाख रुपए खर्च हुए। इस सैटेलाइट में कई तरह के सेंसर और सोलर पैनल भी लगे हुए हैं।

5. साइलेंट हार्ट अटैक की पहचान के लिए यंत्र


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15 साल के छात्र आकाश मनोज के पास विज़िटिंग कार्ड है, जिस पर उनका ओहदा लिखा है कार्डियोलॉजी रिसर्चर। आकाश ने एक ऐसी डिवाइस बनाई है, जो साइलेंट हार्ट अटैक की भी पहचान कर सकती है। दरअसल, आकाश के दादाजी की मौत हार्ट अटैक से हुई थी, जिसके बाद उन्होंने ये डिवाइस बनाने का फैसला किया।

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