तिब्बती बौद्ध परम्परा का महत्वपूर्ण अंग हैं ये जटिल रेत मंडल; बनाने में लगते हैं कई सप्ताह

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Updated on 4 Jan, 2016 at 12:01 pm

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रेत मंडल तिब्बती बौद्ध परम्परा का एक महत्वपूर्ण अंग हैं। रंगीन रेत के कणों से निर्मित इन खूबसूरत रेत मंडलों के निर्माण में कई सप्ताह का समय लगता है, हालांकि इन्हें पूरा किए जाने के तुरन्त बाद ही एक विशेष धार्मिक अनुष्ठान के दौरान इन्हें नष्ट भी कर दिया जाता है। इन्हें नष्ट किए जाने से पहले लोगों को इजाजत होती है कि वे इनकी खूबसूरती को निहार सकें।

दरअसल, इन्हें नष्ट किए जाने को मनुष्य के नश्वर जीवन से जोड़कर देखा जाता है। ऐसा किया जाना प्रतीकात्मक रूप से दर्शाता है कि हम किस तरह अपने जीवन की रचना करते हैं, इसे खूबसूरती से सजाते हैं, लेकिन बाद में हमारी ऊर्जा वापस पृथ्वी में समाहित हो जाती है।

बौद्ध मान्यताओं में कहा गया है कि इन मंडलों की रचना के लिए रंगीन रेत विशेष रूप से बनाए जाएं।

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दरअसल, रंगीन पत्थरों को पीस कर अलग-अलग रंगों के रेत का निर्माण किया जाता है।

रेत मंडलों के निर्माण के लिए बौद्ध संन्यासी ज्यामिति का सहारा लेते हैं। विशेष नाप के मुताबिक पहले डिजायन बनाया जाता है

और इसके बाद छोटे ट्यूब्स के जरिए डिजायन पर रंगीन रेत के कण भरे जाते हैं।

बौद्ध संन्यासी इन मंडलों के निर्माण को सघन साधना मानते हैं, जिसे पूरा करने में कई सप्ताह का समय लग जाता है।

रेत मंडलों के निर्माण के लिए संन्यासी समूहों में काम करते हैं। मसलन, एक रेत मंडल के निर्माण में कई संन्यासी हिस्सा ले सकते हैं। इसके निर्माण की शुरूआत होती है, बीच से।

इसके निर्माण के बाद लोगों को अनुमति होती है कि वे इसे देख सकें। हालांकि इसके तुरन्त बाद इन्हें नष्ट करने के लिए एक पवित्र अनुष्ठान का आयोजन किया जाता है। हालांकि इन्हें नष्ट करने का भी एक विशेष तरीका है।

रेत मंडलों को नष्ट किए जाने के बाद रेत को एक डिब्बे में भर लिया जाता है। इस डिब्बे को सिल्क के एक विशेष कपड़े में बांध कर नदी में प्रवाहित कर दिया जाता है।

यह इस बात का प्रतीक है कि मनुष्य का जीवन क्षणिक है और इसे अंत में प्रकृति में मिल जाना है।

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