इंटरनेट की लहर पर सवार होकर छा रही है हिन्दी, ये रहे सबूत

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Updated on 3 Jan, 2017 at 11:49 am

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इंटरनेट ने दुनिया की कई भाषाओँ को समृद्ध किया है। अन्य भाषाओं की तरह हिन्दी भी इंटरनेट की लहर पर सवार होकर भाषा-विकास की नित नई ऊंचाइयों को छू रही है। हालात कुछ ऐसे हैं कि कुछ वक्त पहले तक इंटरनेट की वजह से हिन्दी के कथित खात्मे की बात हो रही थी और अब पता चला रहा है कि असल में इंटरनेट के इस दौर ने हिन्दी के विकास को अबाध गति प्रदान की है। तकनीक की वजह से नई पीढ़ी को इस भाषा से जुड़ने का मौका मिल रहा है।

हिन्दी के लिए युवाओं में आक्रामकता है। ब्लॉग से लेकर सोशल मीडिया तक पर हिन्दी भारत में सबसे अधिक पढ़े जाने वाली भाषा बनकर उभरी है। देवनागरी की बात अगर छोड़ दी जाए तो भी हिन्दी कई बार रोमन लिपि में दिखती है। यह इंटरनेट पर हिन्दी भाषा की स्वीकार्यता का प्रतीक है। फेसबुक, ट्वीटर, यूट्यूब, ब्लॉग्स पर अलग-अलग पेशों से जुड़े लोग हिन्दी का जबर्दस्त तरीके से उपयोग कर रहे हैं। इनका अनुसरण किया जा रहा है और यह अनुप्रयोग हिन्दी के लिए नई संभावनाएं पैदा कर रहा है। यह स्थिति हिन्दी के लिए उत्साहजनक है।

वर्ष 2016 में टॉपयाप्स के हिन्दी संस्करण ने इंटरनेट पर इस भाषा के प्रचार-प्रसार में उल्लेखनीय भूमिका निभाई। टॉपयाप्स पर हिन्दी में प्रकाशित सैकड़ों लेख और समाचारों को लाखों की संख्या में लोगों ने सोशल मीडिया पर शेयर किया, प्रतिक्रियाएं व्यक्त की। राजनीति की दुनिया से लेकर खेल की दुनिया तक के धुरंधरों ने टॉपयाप्स हिन्दी के इस प्रयास की सराहना की है।

टॉपयाप्स टीम की कोशिश रही है कि हम समाज में घटित हो रही बेहतरीन वाकयातों से अपने पाठकों का परिचय कराएं। उदाहरण के तौर पर जनवरी महीने में हमने 81 साल के युवा बागीचा सिंह की कहानी प्रकाशित की थी, जो 23 सालों से लगातार पैदल चलते हुए एक खास मिशन पर लगे हुए हैं।

अपने मिशन पर बागीचा सिंह।

बागीचा सिंह तम्बाकू, अल्कोहल, बाल मजदूरी, भ्रष्टाचार और अन्य सामाजिक बुराइयों के खिलाफ एक अभियान चला रहे हैं। भारत को 21 बार लांघ चुके बागीचा सिंह की योजना तब तक रुकने की नहीं है, जब तक भारत को बुराइयों से मुक्त नहीं कर लेते। आप बागीचा सिंह की कहानी यहां पढ़ सकते हैं।


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कुछ ऐसी ही प्रेरक कहानी है पठानकोट एयरबेस पर हुए आतंकवादी हमले में घायल होकर जौहर दिखाने वाले जांबाज कमांडो शैलेश गौर की। पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवादी हमले के दौरान 24 वर्षीय शैलेश को एक के बाद एक 6 गोलियां लगीं। इसके बावजूद बिना रुके वह आतंकवादियों पर हमले करते रहे। बहते हुए लहू की कोई परवाह नहीं थी। इस हाल में वह कई घंटे तक मोर्चे पर डंटे रहे थे।

कमांडो शैलेश गौर।

इसी कड़ी में हमने 11 साल की भारतीय मूल की छात्रा काश्मीया वाही से भी पाठकों का परिचय कराया। काश्मीया वही बच्ची है, जिसका दिमाग महान वैज्ञानिकद्वय अल्बर्ट आइंस्टीन और स्टीफन हॉकिंग से भी तेज है। खास बात यह है कि लंदन में रहने वाली काश्मीया ने यहां हुए मेनसा टेस्ट में 100 फीसदी अंक हासिल किए। उसका आईक्यू लेवल 162 है, जबकि आइंस्टीन और हॉकिंग का आईक्यू लेवल 160 था।

काश्मीया वाही।

इसी तरह की एक प्रेरक कहानी के किरदार हैं मेंगलोर में रहने वाले हरेकला हजब्बा। कहने के लिए अनपढ़ हजब्बा समाज में ज्ञान का प्रकाश फैला रहे हैं। फरवरी महीने में हमने प्रकाशित की थी कि पिछले 30 साल से संतरे बेचकर अपना गुजारा चलाने वाले हजब्बा ने पाई-पाई जोड़कर अपने गांव में गरीब बच्चों के लिए एक स्कूल का निर्माण करा दिया। यही नहीं, अब वह एक कॉलेज बनाने का सपना पूरा करना चाहते हैं।

हरेकला हजब्बा।

कुछ ऐसी ही रिपोर्ट्स ये हैं।

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टॉपयाप्स पर इन रिपोर्ट्स को मिले लाखों शेयर और प्रतिक्रियाएं निश्चित रूप से इस बात का द्योतक है कि हिन्दी तेजी से आगे बढ़ रही है। आने वाले दिनों में इसमें दुनिया की तमाम भाषाओं को पीछे छोड़ने की काबीलियत होगी।

करीब 10 साल पहले तक हिन्दी के भविष्य पर विचार करने वाले भाषाविद् इस बात को लेकर चिन्तित होते थे कि हिन्दी की लिपि पर संकट मंडरा रहा है। आज यह कोई समस्या नहीं है। लैपटॉप से लेकर मोबाइल तक हिन्दी राज कर रही है। अपने अंदर थोड़ी इच्छाशक्ति और राष्ट्रभाषा के प्रति सम्मान रखने वाला व्यक्ति अपनी भावना हिन्दी में व्यक्त कर सकता है। यह बेहद आसान भी है।

टॉपयाप्स हिन्दी के बढ़ते कदम से यह साफ है कि आज की तारीख में न तो हिन्दी में सामग्री की कमी है और न ही पाठकों की। हिन्दी की मजबूती का एक अनन्य पक्ष है इसके बाजार की भाषा बनना। यही वजह है कि जल्दी ही इसकी उपयोगिता अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर भी सिद्ध होगी।

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