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भारतीय ख़ुफ़िया एजेंसी RAW से जुड़ी ऐसी 24 दिलचस्प बातें जो आपको इसमें शामिल होने के लिए प्रेरित करेंगी

Updated on 14 September, 2016 at 10:58 am By

रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) भारत का सबसे गोपनीय खुफिया विभाग है। 1962 और 1965 के युद्ध के बाद 1968 में इसका गठन हुआ और तब से यह विदेशी और घरेलू मामलों, आंतकवाद का मुकाबला करने में कार्यरत है।


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बीते कुछ सालों से यह ख़ुफ़िया विभाग चर्चा में नहीं रहा है। इसके बारे में कभी-कभार ही खबरों में कुछ सुनने को मिलता है। लेकिन आइए आज हम आपको इससे जुड़े रोचक तथ्यों से अवगत कराते है।

1.अगर आपने इस एजेंसी के बारे में खबरों में या कहीं और ज़्यादा कुछ नहीं सुना है, तो आप इससे अंदाज़ा लगा सकते है कि यह वास्तव में कितना गुप्त है।

आखिरकार, उन्हें अपनी जानकारी गोपनीय रखनी पड़ती है और अपनी उपलब्धियों को सार्वजानिक नहीं करना होता चाहे वो कितने भी प्रबल क्यों न हो।

 

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2. रॉ में ड्यूटी पर तैनात अधिकारी को बंदूक नहीं मिलती।

जरा सोचिए, अगर एक भारतीय सादे कपड़ों में विदेशी धरती पर खड़ा होकर किसी को गोली मार दे। तब क्या कोहराम मच सकता है। रॉ के एजेन्ट हथियार का इस्तेमाल ज़रुरत पड़ने पर, परिस्थिति के अनुरूप करते है। हां, बचाव के लिए ये एजेन्ट अपनी तेज बुद्धि का इस्तेमाल करते हैं।

 

3. एजेंसी का गठन 1968 में भारत के बेहतरीन गुप्तचर विशेषज्ञों में से एक, रामेश्वर नाथ काव के नेतृत्व में किया गया।


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मात्र तीन वर्षों में ही एजेंसी ने एक नए राष्ट्र (बांग्लादेश) के गठन में अहम भूमिका निभाई। भारत ने 1962 में हुए भारत-चीन युद्ध से कई सबक सीखे।

 

संयुक्त खुफिया समिति के अध्यक्ष केएन दारुवाला ने रामेश्वर नाथ काव के बारे में बात करते हुए कहा थाः
“उनका संपर्क दुनिया भर से है, ख़ास तौर से एशिया- अफगानिस्तान, ईरान, चीन, या आप कोई भी देश बोले। उनमें इतना सामर्थ्य था कि वह अपने एक फ़ोन कॉल से चीज़ों को यहाँ से वहां कर सकते थे। वह एक ऐसे टीम लीडर थे, जिन्होंने कुख्यात अंतर-विभागीय और अंतर-सेवा प्रतिद्वंद्विताओ को बाहर का रास्ता दिखाया, जो भारत में आम बात है।”

4. काव के नेतृत्व में भारत ने 1971 में बांग्लादेश में सशस्त्र बलों को सहायता प्रदान की।

पाकिस्तान ऑपरेशन सर्चलाइट में हार गया था। काव के नेतृत्व में रॉ को 1971 के युद्ध के दौरान पूर्वी पाकिस्तान के मंत्रिमंडल पर खुफिया गतिविधियों की जानकारी मिली। भारतीय वायु सेना ने उस जगह पर बमबारी की। खुफिया जानकारी के आधार पर, नौसेना कमांडो ने चटगांव बंदरगाह पर मौजूद पाकिस्तान के जहाजों को उड़ा दिया था।

5. रॉ ने सिक्किम के भारत में विलय होने में एक प्रमुख भूमिका निभाई।

चीन हमेशा से ही अधिनायकवादी रहा है। यह देश सिक्किम को अधिग्रहण करना चाहता था, लेकिन भारत के पास काव थे और चीन की यह कोशिश विफल रही। इस तरह सिक्किम भारतीय गणराज्य का 22वां राज्य बना।

6. ऐसा माना जाता है कि रॉ हाल ही में चुनावों के दौरान श्रीलंका में सत्ता परिवर्तन के लिए एक मिशन पर था और वह मिशन पूरा भी हुआ।

ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि माना जाता है कि श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे चीन से अपना मेलजोल बढ़ाने के इच्छुक थे, जो भारत के लिए सामरिक दृष्टि से उचित नहीं था।

7. भारत के परमाणु कार्यक्रम को गोपनीय रखना रॉ की जिम्मेदारी थी।

भारतीय वैज्ञानिक और भारत सरकार इस क्षेत्र में क्या कर रही है, इसे पता लगाने में अमेरिकी खुफिया एजेन्सी सीआईए को विफलता हाथ लगी। इस घटना को सीआईए की बड़ी विफलता के रूप में देखा जाता है।



 

8. एक रॉ जासूस की ज़िन्दगी, फिल्मों में दर्शाई गई जासूस की ज़िन्दगी से कहीं से भी मेल नहीं खाती।

न तो उनके पास तकनीक से लैस कारें होती हैं और न हीं गैजेट्स। जी हां, फिर भी जासूसी में वे अव्वल हैं।

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9. एक जासूस के राज़ उसकी कब्र के साथ ही दफन हो जाते हैं। यहां तक कि उसकी पत्नी को तक नहीं पता होता कि उसका पति एक रॉ एजेंट है।

एक ठोस सच्चाई यह है कि भारत की खुफिया एजेंसी अपने आप ही आप तक पहुंचेगी। उन्हें खोजने की कोशिश मत करिए।

10. अगर एक पुलिसवाला रॉ में आना चाहता है, तो उसका पुलिस रिकॉर्ड बेदाग होना बेहद ज़रूरी है।

प्रत्याशी का विश्वविद्यालय से ग्रेजुएट होना, कुछ ही घंटों के नोटिस पर जाने के लिए तैयार रहना, और किसी भी तरह के ड्रग का सेवन न करना, यह सब अनिवार्य है। इसके अलावा, प्रत्याशी के माता-पिता भारतीय होने चाहिए।

11.चीनी, अफगानी, पख्तून या किसी भी अन्य भाषा का ज्ञान आपको दूसरों से ऊपर खड़ा करता है, और कई मायनों में फायदेमंद है।

 

12. अपने विभाग से कुछ भी छिपाने की कोशिश न करें।

रॉ भारत में बिग ब्रदर की तरह है, अगर आपको लगता है कि होशयारी में आप उसे मात से सकते हैं, तो फिर आप एक नई चुनौती के लिए तैयार रहें।

13. एक अच्छा खेल रिकॉर्ड आपके यहाँ प्रवेश के अवसर को बढ़ा देगा।

हमने सुना है कि भावी अधिकारियों के रेफ़री और प्रशिक्षकों के इंटरव्यू यहाँ होते रहते हैं। तो अब से अपने गुरूजी के साथ अच्छे से बनके और बनाके रहो।

14. यह साबित करने के लिए हमेशा तैयार रहें कि आप दिन के चौबीसों घंटे, हफ्ते के सातों दिन, किसी भी परिस्थिति में काम कर सकते हैं और खुद को उन परिस्थितियों के अनुरूप ढाल सकते हैंं।

यह एक डेस्क में बैठकर काम करने वाली नौकरी नहीं है। आप किसी मिशन पर हो, तो पूरी सम्भावना है कि आपके परिवार को भी नहीं पता होगा कि आप कहाँ हैं।

15. इसका प्रशिक्षण(ट्रेनिंग) इतना आसान नहीं है जितना हम समझते हैं। यह आपके मस्तिष्क, शरीर और मन को परखता है।

एक अफवाह यह भी है कि कड़ा प्रशिक्षण होने के कारण इसको छोड़ने वालों का अनुपात बहुत अधिक है।

16. आपके रॉ में शामिल होने का इच्छुक सपना एक राज़ होगा।

अगर आप इसकी घोषणा फेसबुक पर करने की फ़िराक में है तो फिर अभी इसी वक़्त आपका ये सपना ‘टाटा, गुड बाई’ हो सकता है। और फिर आपका सपना धरा का धरा रह जाएगा।

17. सशस्त्र बलों से ताल्लुक रखने वाले वहां के कर्मियों को यह फायदा है कि उन्हें पहले से ही नेतृत्व कौशल के लिए प्रशिक्षित किया जाता है।

ऐसा कहा जाता है कि पहली वरीयता, सशस्त्र और अर्धसैनिक बलों से आए कर्मियों को दी जाती है।

18. याद रखे, रॉ में शामिल होना कोई मालामाल होने का टिकट नहीं है।

कोई भी ख़ुफ़िया विभाग ऐसा प्रत्याशी नहीं चाहेगा जिसे आसानी से रिश्वत, या लालच दिया जा सके। अगर आपको राज और सत्ता दोनों चाहिए तो इसके बजाय राजनीति आज़माएं।

19. रॉ पिछले एक दशक में संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा से प्रत्याशियों का चुनाव कर रहा है।

आम धारणा के विपरीत, मिशन पूरा होने के बाद, अधिकारी को अनुमति होती है कि वह अपने मूल विभाग में वापस शामिल हो सकते है। अगर आपके पास इतना शौर्य नहीं बचा है तो आप बेशक वापस जा सकते हैं।

 

20. यहां तक कि रचनात्मक क्षेत्रों के लोग भी रॉ में शामिल हो सकते हैं।

थियेटर कलाकार रविन्द्र कौशिक लोगों की नजरों में आए जो ऐसा ही एक उदाहरण है। हेमंत करकरे ने भी लगभग एक दशक के लिए ऑस्ट्रिया में रॉ के लिए काम किया था।

21. वर्तमान में रॉ की अपनी रॉ संबद्ध सेवाएं विंग है।

ऐसे प्रत्याशी जिनका चुनाव रक्षा बलों से हुआ हो उन्हें इसमें शामिल होने से पहले अपने मूल विभाग से इस्तीफा देना आवश्यक हैं।

 

22. आपको NATI (नेशनल एप्टीट्यूड टेस्ट इन इंटेलिजेंस) में परखा जा सकता है।

लेकिन तब भी आपको इंटेलिजेंस एवं साइकोलॉजिकल एप्टीट्यूड टेस्ट को पास करने की ज़रुरत होगी।

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23. इसमें शामिल होने का सबसे अच्छा तरीका है यूपीएससी पास कर। आईपीएस या आईएफएस कैडर पद में कार्यरत हो जाओ।

 


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24. अजीत डोभाल, प्रधानमंत्री के वर्तमान राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार, इनका भारत सरकार के खुफिया विभाग में एक बेहतरीन करियर रहा है।

उनका कार्यकाल और उनकी बेजोड़ नीतियां एक जासूसी फिल्म की शानदार कहानी लगती है।

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