ये हैं रामायण की बेहद रोचक और हैरान कर देने वाली अनसुनी बातें

Advertisement
दीपावली के दिन रामजी विजयी होकर अयोध्या लौटे थे। सिया-राम और लक्ष्मण के आने की खुशी में ही दिवाली का पर्व बड़े ही उत्साह के साथ मनाया जाता है। आज हम आपको रामायण से जुड़ी रोचक बातें बताने जा रहे हैं, जिसके बारे में बहुत कम ही लोग जानते होंगे।

क्या आप जानते हैं एक स्त्री ने रावण से अपने अपमान का बदला लेने के लिए दूसरे जन्म में सीता के रूप में जन्म लिया था?

दरअसल, वाल्मीकि रामायण के अनुसार, एक अति सुंदर स्त्री जिसका नाम वेदवती था, पर  रावण की बुरी नज़र पड़ गई।वेदवती उस वक़्त भगवान विष्णु को पति रूप में पाने के लिए तप कर रही थी। रावण ने उसके बाल पकड़े और अपमानित करके अपने साथ ले चलने की हठ करने लगा। उस तपस्विनी ने रावण को श्राप दिया कि एक स्त्री के कारण ही तेरी मृत्यु होगी। इतना कहकर उसने आत्मदाह कर लिया। फिर इसी वेदवती ने रावण से अपने अपमान का बदला लेने के लिए अगले जन्म में सीता के रूप में जन्म लिया।

भरत को पहले से था अपने पिता के मृत्यु का आभास

 अपने पिता राजा दशरथ की मृत्यु का आभास भरत को पहले ही हो गया था। दरअसल, सपने में भरत ने राजा दशरथ को काले वस्त्र पहने और उनके ऊपर स्त्रियों को प्रहार करते देखा था। सपने में राजा दशरथ तेजी से दक्षिण की ओर जाते दिखे।

यमराज से भी हुआ था रावण का युद्ध

रावण जब विश्व विजय पर निकला तो वह यमलोक भी जा पहुंचा। वहां यमराज और रावण के बीच भयंकर युद्ध हुआ। जब यमराज ने रावण के प्राण लेने के लिए कालदण्ड का प्रयोग करना चाहा, तो ब्रह्मा ने उन्हें ऐसा करने से रोक दिया क्योंकि किसी देवता द्वारा रावण का वध संभव नहीं था।

शूर्पणखा भी चाहती थी रावण का सर्वनाश

रामायण के अनुसार रावण की बहन शूर्पणखा भी रावण का सर्व-विनाश चाहती थी शूर्पणखा के पति का नाम विद्युतजिव्ह था। वो कालकेय नाम के राजा का सेनापति था। रावण जब विश्वयुद्ध पर निकला तो कालकेय से उसका युद्ध हुआ। उस युद्ध में रावण ने विद्युतजिव्ह का भी वध कर दिया। तब शूर्पणखा ने मन ही मन रावण को श्राप दिया कि मेरे ही कारण तेरा सर्वनाश होगा।

सिर्फ़ 33 देवताओं का है वर्णन

रामायण के अरण्यकांड के अनुसार सृष्टि में सिर्फ तैंतीस देवता हैं जिनमें  बारह आदित्य, आठ वसु, ग्यारह रुद्र और दो अश्विनी कुमार, मिलाकर सिर्फ़ 33 देवता हैं।

राजा दशरथ का पुत्रेष्टि यज्ञ ऋषि ऋष्यश्रृंग ने करवाया था।

क्या आपको पता है राजा दशरथ का पुत्रेष्टि यज्ञ ऋषि ऋष्यश्रृंग ने करवाया था ? ऋष्यश्रृंग के पिता का नाम महर्षि विभाण्डक था। एक दिन जब वे नदी में स्नान कर रहे थे, तब नदी में उनका वीर्यपात हो गया। उस जल को एक हिरणी ने पी लिया, जिसके फलस्वरूप ऋषि ऋष्यश्रृंग का जन्म हुआ था। इनके सिर पर हिरण की तरह एक सींग भी था।
Diwali 2018 : interesting facts of Ramayana - रामायण के तथ्य


indianetzone


Advertisement

नहीं हुआ था सीता का कोई स्वयंवर

श्रीरामचरित मानस और वाल्मीकि रामायण में कुछ प्रसंगों को लेकर मतभेद भी हैं। वाल्मीकि रामायण में सीता स्वयंवर का कोई वर्णन नहीं है। उसके अनुसार एक बार राम व लक्ष्मण का ऋषि विश्वामित्र के साथ मिथिला में आगमन हुआ, जहां विश्वामित्र ने ही राजा जनक से श्रीराम को वह शिवधनुष दिखाने को कहा। तब श्रीराम ने उस धनुष को उठा लिया और प्रत्यंचा चढ़ाते समय वह टूट गया। तब राजा जनक ने विश्वामित्र से अपनी पुत्री सीता का विवाह भगवान राम से करने का आग्रह किया, क्योंकि राजा जनक ने  यह प्रण किया था कि जो भी इस शिव धनुष को उठा लेगा, उसी से वे अपनी पुत्री सीता का विवाह करेंगे।

नहीं हुआ था परशुराम से लक्षमण का कोई विवाद

वाल्मीकि रामायण के अनुसार, सीता विवाह के दौरान लक्ष्मण और परशुराम का कोई विवाद नहीं हुआ था। इस रामायण के अनुसार सीता से विवाह के बाद जब श्रीराम अयोध्या लौट रहे थे, तब रास्ते में उन्हें परशुराम मिले। उन्होंने श्रीराम से अपने धनुष पर बाण चढ़ाने के लिए कहा। श्रीराम ने जब उनके धनुष पर बाण चढ़ा दिया, तो बिना किसी से विवाद किए वे वहां से चले गए।

नंदी ने दिया था रावण को यह श्राप

एक बार रावण ने नंदी को देखकर उनके स्वरूप की हंसी उड़ाई और उन्हें बंदर के समान मुख वाला कहा। तब नंदी ने रावण को श्राप दिया कि बंदरों के कारण ही तेरा सर्वनाश होगा।

नलकुबेर ने दिया था रावण को श्राप

एक बार रावण ने अपनी वासना पूरी करने के लिए स्वर्ग की अप्सरा रंभा को पकड़ लिया। तब रंभा ने बताया की वह रावण के बड़े भाई कुबेर के बेटे नलकुबेर की सेवा में हैं। इस वजह से रंभा रावण के पुत्रवधू के समान थी, लेकिन रावण ने रंभा से दुराचार किया। यह बात जब नलकुबेर को पता चली, तो उसने रावण को श्राप दिया कि जब भी रावण किसी स्त्री की इच्छा के विरुद्ध उसे स्पर्श करेगा, तो उसका मस्तक सौ टुकड़ों में बंट जाएगा।

इंद्र ने खिलाया था माता सीता को खीर

जिस दिन रावण सीता का हरण कर अशोक वाटिका में लाया। उसी रात भगवान ब्रह्मा के कहने पर देवराज इंद्र माता सीता के लिए खीर लेकर आए। पहले इंद्र ने अशोक वाटिका के सभी राक्षसों को मोहित कर सुला दिया। उसके बाद माता सीता को खीर अर्पित की। इसे खाने से सीता की भूख-प्यास शांत हो गई।

दशरथ ने किया था आग्रह कि राम उन्हें बंदी बना लें

दशरथ नहीं चाहते थे कि राम का वनवास हो, लेकिन वे वचनबद्ध थे। उन्होंने श्रीराम को रोकने की हर संभव कोशिश की। दशरथ ने यहां तक श्रीराम से  कह दिया था कि राम उन्हे बंदी बनाकर स्वयं राजा बन जाएं।

जब समुंद्र पर क्रोधित हुए भगवान राम

श्रीरामचरितमानस के अनुसार, समुद्र ने जब वानर सेना को लंका जाने के लिए रास्ता नहीं दिया तो लक्ष्मण बहुत क्रोधित हुए थे, जबकि वाल्मीकि रामायण में लिखा है कि लक्ष्मण नहीं, बल्कि श्रीराम समुद्र पर क्रोधित हुए थे और उन्होंने समुद्र को सुखा देने वाले बाण भी छोड़ दिए थे। तब लक्ष्मण व अन्य लोगों ने भगवान श्रीराम को समझाया था।

सीता नहीं इस श्राप की वजह से हुई थी राम के हाथों रावण की मृत्यु

एक बार रावण और रघुवंश कुल के एक परम प्रतापी राजा अनरण्य के बीच भयंकर युद्ध हुआ, जिसमें  राजा अनरण्य की मृत्यु हो गई, लेकिन मरने से पहले उन्होंने रावण को श्राप दिया कि मेरे ही वंश में उत्पन्न एक युवक तेरी मृत्यु का कारण बनेगा।

रामसेतु का निर्माण मात्र 5 दिन में हुआ था पूरा

रामायण के अनुसार, समुद्र पर पुल बनाने में 5 दिन का समय लगा। पहले दिन वानरों ने 14 योजन, दूसरे दिन 20 योजन, तीसरे दिन 21 योजन, चौथे दिन 22 योजन और पांचवे दिन 23 योजन पुल बनाया था। इस प्रकार कुल 100 योजन लंबाई का पुल समुद्र पर बनाया गया। यह पुल 10 योजन चौड़ा था।

विश्वकर्मा के पुत्र थे नल

वाल्मीकि रामायण के अनुसार, नल देवताओं के शिल्पी (इंजीनियर) विश्वकर्मा के पुत्र थे और वह स्वयं भी शिल्पकला में निपुण थे। अपनी इसी कला से उसने समुद्र पर पुल का निर्माण किया था।

कबंध ने श्रीराम को सुग्रीव से मित्रता करने का दिया था सलाह

जब श्रीराम और लक्ष्मण वन में सीता की खोज कर रहे थे। उस समय कबंध नामक राक्षस का राम-लक्ष्मण ने वध किया था। वास्तव में कबंध एक श्राप के कारण राक्षस बन गया था। जब श्रीराम ने उसका दाह संस्कार किया तो वह श्राप मुक्त हो गया। कबंध ने ही श्रीराम को सुग्रीव से मित्रता करने के लिए कहा था।
Diwali 2018 : surprising ramayana facts - रामायण के अनसुने तथ्य


ritsin


Advertisement

इस वजह से मेघनाथ का नाम पड़ा था इंद्रजीत

रावण का मेधावी पुत्र मेघनाथ ने एक युद्ध में देवराज इंद्र को बंदी बना लिया था। बाद में ब्रह्माजी के कहने पर उसने इंद्र को छोड़ दिया। इंद्र पर विजय पाने के कारण ही मेघनाद का एक नाम इंद्रजीत पड़ा।

आपके विचार


  • Advertisement