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शेयरिंग तकनीक ब्लू-टूथ का ये नाम कैसे पड़ा? यकीनन नहीं जानते होंगे आप

9:35 am 3 Aug, 2017

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मोबाइल और लैपटॉप इस्तेमाल करने वाला हर इंसान इस नाम से अच्छी तरह परिचित होगा, लेकिन यकीन मानिए उनमें से शायद ही किसी को यह जानकारी नहीं होगी कि शेयरिंग के लिए बने ब्लू-टूथ का नाम कैसे पड़ा। आज लगभग सभी डिवाइसेज़ में ब्लू-टूथ का इस्तेमाल होता है। अब भले ही इसकी अहमियत थोड़ी कम हो गई है, क्योंकि अब ढेर सारे मैसेजिंग ऐप जो आ गए हैं, लेकिन कभी ये गाने, वीडियो और फोटो शेयर करने का सबसे आसान ज़रिया था।

ब्लू-टूथ का आविष्कार 1994 में हुआ था। इसे बनाया था स्वीडन की टेलीकॉम कम्पनी Ericsson ने। इस कम्पनी के इंजीनियर्स ने एक-दूसरे की मदद से ब्लू-टूथ तकनीक का इजाद किया। ब्लू-टूथ के नाम और उसके नीले रंग के सिंबल के पीछे की कहानी बहुत दिलचस्प है।


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दसवीं शताब्दी में डेनमार्क के राजा Harald Blatand थे और उन्हें ब्लूबेरी बहुत पसंद था। ज़्यादा ब्लूबेरी खाने से उनके दांत भी नीले पड़ गए थे। उसी राजा को ध्यान में रखते हुए इस डिवाइस का नाम ब्लूटूथ रखा गया। इसके अलावा राजा के नाम को Scandinavian Runes में Hagal Bjarkan लिखा जाता है। इसी नाम के पहले दोनों अक्षरों, H और B को मिलाकर ब्लू-टूथ का सिंबल बना है।

ब्लू-टूथ आज के डिजिटल युग का अहम हिस्सा बन गया है। आजकल की करीब 95% डिवाइसेज़ में ये होता है। डिजिटल क्रांति लाने में ब्लू-टूथ की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही है।

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