कैलाश मानसरोवर से जुड़े इन रोचक तथ्यों को जानकर आप भी बना लेंगे यहां जाने का मन

Updated on 11 Jun, 2018 at 3:04 pm

Advertisement

चीन के तिब्बत में स्थित कैलाश मानसरोवर दुनिया का सबसे ऊंचा शिवधाम है। इसे भगवान शिव का स्थायी निवासी भी कहा जाता है। श्रद्धालुओं  के लिए वर्षों से यह पवित्र स्थान आस्था का केंद्र रहा है। भगवान शिव के 12 ज्योतिलिंगो में से इस स्थान को सबसे श्रेष्ठ माना गया है। कहा जाता है कि मानसरोवर के पास स्थित कैलाश पर्वत पर भगवान शिव खुद विराजमान हैं। सनातन धर्म में इस स्थान का धार्मिक महत्व अन्य किसी भी धार्मिक स्थान से कहीं ज्यादा है, जिसकी वजह से लाखों श्रद्धालु प्रतिवर्ष इसके दर्शन के लिए जाते हैं।

 

 

कैलाश मानसरोवर जाने के कई रास्ते हैं, जो ठंडे और ऊंचे पर्वतीय इलाकों से होकर गुजरते हैं। हर साल श्रद्धालुओं के कई दल इन कठिन रास्तों से अपनी यात्रा तय करते हैं। कैलाश मानसरोवर तक पहुंचने का पहला रास्ता उत्तराखंड का लिपुलेख दर्रा है, जबकि दूसरा रास्ता सिक्किम के नाथुला मार्ग है। बीते साल नाथुला दर्रा को चीन ने बंद कर दिया था जिसके कारण यात्रियों को खासी परेशानी हुई थी। हालांकि, इस साल नाथुला दर्रा को श्रद्धालुओं के लिए दोबारा खोल दिया गया है।

 

 

इस यात्रा के लिए फिजिकली फिट होना बेहद जरूरी है। अगर आप शारीरिक रूप से अक्षम हैं तो आपको सरकार द्वारा इस यात्रा पर जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। यात्रा से पूर्व सरकार योग्यता और यात्रा से संबंधित शर्तों का विवरण देती है, जिसके बाद चुने गए तीर्थ यात्रियों की घोषणा की जाती है। करीब एक महीने तक चलने वाली इस यात्रा में भारतीय श्रद्धालुओं के कई दल जाते है। इस साल 12 जून से ये यात्रा आरंभ होने वाली है। अगर आप भी इस यात्रा पर निकल रहे हैं तो जान लीजिए इस पवित्र धार्मिक स्थान से जुड़ी ये रोचक बातें।

 

 

कैलाश पर्वत की ऊंचाई

भारत के तिब्बत में स्थित कैलाश मानसरोवर समुद्र सतह से 22,068 फुट की ऊंचाई पर बसा हुआ है। कैलाश भगवान शिव का नाम है और मानसरोवर मानस और सरोवर से मिलकर बना है, जिसका मतलब है मन का सरोवर।

 

 

चार धर्मों का आध्यात्मिक केंद्र है कैलाश पर्वत

कैलाश पर्वत को तिब्बती बोद्ध, बौद्ध धर्म, जैन धर्म, और हिंदू धर्म का आध्यात्मिक केंद्र माना जाता है। इन सभी धर्मों की यहां से एक पौराणिक कथा जुड़ी हुई है।


Advertisement

 

 

कैसे हुआ कैलाश पर्वत का निर्माण

वैज्ञानिकों की माने तो करीब 10 करोड़ साल पहले भारतीय उपमहाद्वीप के चारों ओर समुद्र हुआ करता था। लेकिन इस महाद्वीप के रूस से टकराने के कारण हिमालय निर्मित हुआ। इससे कैलाश पर्वत की रचना हुई।

 

यहां गूंजती है ॐ की ध्वनि

यहां आए श्रद्धालुओं को ॐ की ध्वनि भी सुनाई देती है। तल से परावर्तित होकर निकलने वाली इस ध्वनि को यहां सुना जा सकता है।

 

कुबेर की नगरी है ये

इस स्थान को कुबेर की नगरी भी कहा जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार गंगा नदी भगवान विष्णु के करकमलों से निकलकर कैलाश पर्वत की चोटी पर गिरती है और भगवान शिव उन्हें अपनी जटाओं में भरदार धरती में बहा देते हैं।

 

स्वर्ग लोक और मृत्यु लोक दोनों है यहां

इस शिवधाम के बारे में लोगों की मान्यता है कि यहां स्वर्ग लोक और मृत्यु लोक दोनो ही हैं। कैलाश पर्वत के ऊपर स्वर्गलोक है, जबकि नीचे मृत्यु लोक बसा हुआ है।

 

 

इस पवित्र स्थान पर है एक चमत्कारी वृक्ष 

बौद्ध धर्म में कहा गया है कि कैलाश मानसरोवर के बीचों बीच एक चमत्कारी वृक्ष है, जिसके फूलों से सभी प्रकार के शारीरिक और मानसिक रोगों को दूर किया जा सकता है।

 

 

वेद पुराण में इस बात का जिक्र है कि कैलाश मानसरोवर पहुंचकर यदि कोई व्यक्ति ध्यान करे तो उसे मोक्ष प्राप्त हो जाता है।

Advertisement

आपके विचार


  • Advertisement