एक अकेली सालूमरदा थिमक्का ने लगा दिए बरगद के 384 पेड़

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Updated on 16 Oct, 2018 at 6:47 pm

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कहते हैं, हिम्मते मर्दा, मददे खुदा। इसी कहावत को चरितार्थ कर दिखाया है कर्नाटक की सालूमरदा थिमक्का ने। वह राज्य के रामनगर जिले में हुलुकल और कुडूर के बीच राष्ट्रीय राजमार्ग के दोनों तरफ करीब चार किलोमीटर की दूरी तक अब तक 384 बरगद के पेड़ लगा चुकी हैं।

कभी एक सामान्य मजदूर की तरह काम करने वाली थिमक्का ने अपने एकाकीपन से बचने के लिए बरगद का पेड़ लगाना शुरू किया था।

बाद में उनका शौक बढ़ता ही गया और एक के बाद एक उन्होंने इतने सारे पेड़ लगा दिए। इन वृक्षों को उन्होंने मानसून के समय लगाया था, ताकि इनकी सिंचाई के लिए अधिक परेशानी का सामना न करना पड़े। अब इन पेड़ों की देखभाल कर्नाटक सरकार कर रही है।

प्रकृति के प्रति थिमक्का के असीम प्रेम को देखते हुए उनका नाम ‘सालूमरदा’ दे दिया गया। कन्नड़ भाषा में ‘सालूमरदा’ का मतलब वृक्षों की पंक्ति होता है।

saalumarada thimmakka

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सिर्फ नाम ही नहीं, उन्हें अबतक कई सम्मान और पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है।



वर्ष 1995 में उन्हें नेशनल सिटीजन्स अवार्ड दिया गया था। जबकि वर्ष 1997 में उन्हें इन्दिरा प्रियदर्शिनी वृक्षमित्र अवार्ड और वीरचक्र प्रशस्ति अवार्ड से सम्मानित किया गया था। इस अनोखे अन्दाज में प्रकृति की सेवा के लिए थिमक्का को वर्ष 2006 में कल्पवल्ली अवार्ड और वर्ष 2010 में गॉडफ्रे फिलिप्स ब्रेवरी अवार्ड से सम्मानित किया गया था।

उन्हें आध्यात्मिक गुरू रविशंकर द्वारा संचालित आर्ट ऑफ लिविंग व हम्पी युनिवर्सिटी द्वारा भी सम्मानित किया जा चुका है। सालूमरदा थिमक्का के प्रकृति-प्रेम को TopYaps भी सलाम करता है।


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