धैर्य और कर्मयोग की मिशाल है यह बच्चा।

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Updated on 15 Nov, 2015 at 12:10 am

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कहावत है, होनहार वीरवान के होत चीकने पात। इस बच्चे को देखिए। दिवाली के दिन कन्दील बेचने वाले इस बच्चे की अपना महात्वाकांक्षा है। यह स्कूल में पढ़ता है और वैज्ञानिक बनना चाहता है, लेकिन अपनी मजबूरियों को भी समझता है। उसे पता है कि जिन्दगी में कठिन संघर्ष है, इसके बावजूद आगे बढ़ रहा है।

“एक सप्ताह के लिए स्कूल में छुट्टी में, इसलिए मैनें तय किया कि मैं इन कन्दील को बनाउंगा और बाजार में जाकर इन्हें बेचने की कोशिश करूंगा। मेरे पिता यहां सब्जी बेचते हैं। इसलिए मेरे लिए यहां छोटी सी जगह पर यह बेचना आसान हो गया। और तो और मैने अब तक 100 बेच भी डाले हैं।”

जब उससे पूछा गया, ‘तुम इस पैसे से क्या करना चाहते हो?’


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“मैं एक वैज्ञानिक बनना चाहता हूं, लेकिन बाबा कहते हैं कि मेरे परिवार के लिए इतना सारा रुपया जुटा पाना संभव नहीं होगा। इसलिए जब कभी भी मुझे पढ़ाई से छुट्टी मिलती है, मैं कुछ न कुछ बेचने की कोशिश करता हूं और अपने आगे की पढ़ाई के लिए जमा करता हूं।”

यह बच्चा उन सभी लोगों के लिए प्रेरणास्त्रोत है, जो भले ही तमाम मुश्किलों से जूझ रहे हैं, लेकिन अपनी जिन्दगी में कुछ न कुछ करना चाहते हैं।

साभारः ह्युमन्स ऑफ बॉम्बे

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