ये हैं साल 2017 के सबसे दमदार आईएएस अधिकारी, जिन्होंने सबका दिल जीत लिया

Updated on 27 Dec, 2017 at 6:30 pm

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इरादे मजबूत हों तो दुनिया मुठ्ठी में आ सकती है। वैसे तो सभी आईएएस अधिकारी देश को बदलने की सोचते हैं, लेकिन उनमें से कुछ ही अपने मन की कर पाते हैं। मेहनत, लगन और ईमानदारी हो तो बदलाव अवश्य होता है। आइये जानते हैं उन अधिकारियों के बारे में जिन्होंने अपने कार्यों से न केवल परिवर्तन का आगाज किया, बल्कि सुर्ख़ियों में भी रहे।

ये रहे साल 2017 के 10 प्रेरणादायक अधिकारी।

1. पारसनाथ नायर

 

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पारसरनाथ नायर ने कोझिकोड का कलेक्टर बन लोगों से जुड़े कई मुद्दों को फिर से उठाया और उनपर सार्वजनिक रूप से सराहनीय काम भी किया। 2007 केरल कैडर के आईएएस अधिकारी नायर हाल ही में राज्य मंत्री के सचिव के रूप में नियुक्त किए गए हैं। ये इतने लोकप्रिय हैं कि इन्हें लोग ‘कलेक्टर ब्रो’ कहते हैं। इन्होंने ऑपरेशन सुलेमानी, तेरे मेरे बीच में और यो अपोपा जैसी परियोजनाओं के माध्यम से लोगों की जिन्दगी बदलने का काम किया।

2. पोमा टुडू

 

ओडिशा के नुआपड़ा जिले की कलेक्टर डॉ. पोमा टुडू ने अधिकारियों के लिए मिशाल कायम कर दी। वह प्रतिदिन करीब दो घंटे का सफ़र तय कर जनता की शिकायतें सुनने जाती हैं। पोमा 2012 बैच ओडिशा कैडर की आईएएस अधिकारी हैं और वे आदिवासी परिवार से कॉलेज और बैंक में नौकरी पाने वाली पहली महिला थीं। इन्होंने मेडिकल की पढ़ाई भी की है।

3. सुरेंद्र कुमार सोलंकी

 

प्रधानमंत्री एक्सीलेंस अवॉर्ड से सम्मानित सुरेन्द्र कुमार सोलंकी ने आदिवासी अंचल में महिला इंजीनियर्स के माध्यम से सोलर लैम्प प्रोजेक्ट का नवाचार किया था। इन्होंने सामाजिक बदलाव के लिए कई कार्य किए हैं। इन्होंने पिछले दिनों उदयपुर के मुस्कान शेल्टर होम से छाया नाम की एक लड़की को भी गोद लिया था। इस बच्ची की चाची ने ही इसका जीना दूभर कर रखा था। ऐसे में सोलंकी ने इसे गोदकर लेकर भविष्य संवारने का वचन दे दिया।

4. मीर मोहम्मद अली

 

2011 केरल कैडर बैच के अधिकारी ने अपने प्रयास से अप्रैल 2017 में कन्नूर को भारत का पहला प्लास्टिक मुक्त ज़िला बनाने में सफलता हासिल की। जो काम कई सालों में न हो सके, वो इन्होंने मात्र 5 महीने में कर दिखाया।

5. परिकिपंदला नरहरि

 

मध्यप्रदेश कैडर 2001 बैच के आईएएस अधिकारी पी. नरहरि को विकलांगों के लिए विशेष कार्य करने पर सम्मानित किया गया। इनके कार्यकाल में ग्वालियर के स्कूल संचालकों ने इस साल फ़ीस नहीं बढ़ाने का निर्णय लिया। इन्होंने बीआरटीएस का चौड़ीकरण, मेट्रो प्रोजेक्ट, खान नदी किनारे से अतिक्रमण हटवाना आदि कई जटिल मुद्दों पर किया है।



6. भारती हॉलिकेरी

 

भारती ने तेलंगाना के मेडक ज़िला स्थित प्राइमरी हेल्थ सेंटर में चेकअप के लिए आने वाली गर्भवती महिलाओं को लंच की सुविधा उपलब्ध कराई वो भी सरकार पर अतिरिक्त खर्च डाले बिना। दरअसल, खाना आंगनवाड़ी से आ रहा था। भारती ने महसूस किया कि गर्भवती महिलाएं चेकअप के लिए अस्पताल आने के क्रम में भूखी रहती हैं, जो उनके स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं है। भारती ने स्वच्छता अभियान सहित जिले में कई सकारात्मक परिवर्तन किए।

7. पीएस प्रद्युम्ना

 

पीएस प्रद्युम्ना के नाम एक लाख टॉयलेट बनवाने जैसे अनोखे काम हैं। इन्होंने महिलाओं की सुरक्षा के लिए शैक्षिक संस्थानों, बस स्टॉप जैसी जगहों पर निर्भया पैट्रोलिंग नामक एक लोकप्रिय प्रोग्राम भी चलाया। इतना ही नहीं, इन्होंने किसानों की भलाई के लिए भी अनेक प्रयास किए हैं।

8. सौरभ कुमार

 

सौरभ कुमार दंतेवाड़ा क्षेत्र में सरकार की योजनाओं को प्रभावशाली ढंग से लागू कर रहे हैं। लिहाजा दंतेवाड़ा का विकास तेजी से हो रहा है। इंतना ही नहीं, यहां पर नक्सलवादी गतिविधियां पहले से कम हो गई हैं। मध्याह्न भोजन हो, स्वच्छता हो या फिर कैशलेस योजना, दंतेवाड़ा अब नये कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। जिले के ‘पालनार’ गांव को बिना मोबाइल नेटवर्क के इन्होंने कैशलेस बनाने में सफलता हासिल की।

9. रोनाल्ड रोज़

 

आईएएस रोनाल्ड ने तेलंगाना के महबूबनगर ज़िले में शौचालयों और जैविक खेती के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए हैं। ज़िले में विकास स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।

10. रोहिणी आर

 

रोहिणी सलेम ज़िले की नई कलेक्टर नियुक्त बनकर आई तो लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई। वे जनता के बीच जाकर लोगों की बात सुनती हैं और समाधान देती हैं।


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