भीषण सूखे की वजह से मिट गया था सिन्धु घाटी सभ्यता का नामोनिशान

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Updated on 4 Nov, 2016 at 4:20 pm

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करीब 4200 साल पहले संभवतः भीषण सूखे की वजह से सिन्धु घाटी सभ्यता का नामोनिशान मिट गया था। यह बात एक नए अध्ययन में सामने आई है।

यही नहीं, मिस्र, ग्रीस और मेसोपोटामिया की ऐतिहासिक सभ्यताओं के नाश का कारण भी लंबे समय तक चलने वाला भीषण सूखा था।

विशेषज्ञों का मानना है कि दक्षिण एशिया में मानसून चक्र जीवन के पनपने और स्थिर रहने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। लेकिन ईसा से करीब 2 हजार साल पहले यह चक्र संभवतः 200 सालों के लिए रुक गया होगा। यही वजह है कि यहां पनपने वाली सिन्धु घाटी सभ्यता का नाश हो गया।

वर्तमान में पाकिस्तान में पड़ने वाली सिन्धु घाटी की सभ्यता एक अत्यन्त विकसित सभ्यता थी। इसके मोहनजोदड़ो, कालीबंगा, लोथल, धोलावीरा, राखीगढ़ी और हड़प्पा जैसे प्रमुख केन्द्र थे।

ये शहर पूरी योजना के साथ बसाए गए थे। माना जाता है कि इस सभ्यता के लोग धीरे-धीरे इस स्थान से पलायन करने लगे और इन शहरों का नाश होता रहा।

कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय की विशेषज्ञ यमा दीक्षित और उनकी टीम ने हरियाणा से सटे हुए सिन्धु घाटी इलाके में पड़ने वाले एक प्राचीन झील कोटला दाहर के अवसादों की जांच की। इस जांच के बाद सामने आया है कि करीब 4200 साल पहले यहां मानसूनी बारिश एकदम नहीं हुई।


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इन क्षेत्रों में मानसूनी बारिश करीब 100 से 200 सालों तक नहीं हुई। मानसूनी बारिश न होने की वजह से यहां से लोगों का पलायन शुरू हो गया।

देहरादून स्थित वाडिया इन्सटीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी के निदेशक अनिल गुप्ता कहते हैं कि इससे सूखे की एक प्राचीन घटना के बारे में पता चलता है, लेकिन यह प्रश्न अब भी अनुत्तरित है कि 4100 साल पहले जयवायु परिवर्तन की यह घटना आखिर हुई क्यों।

वहीं महाराष्ट्र के लोनार झील से अवसादों की जांच से पता चला है कि इस इलाके में सूखे का प्रकोप करीब 4600 साल पहले शुरू हो गया था।

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