तारा रानी श्रीवास्तव के लिए जान से भी प्यारा था तिरंगा

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Updated on 9 Aug, 2016 at 2:24 am

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भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में अनगिनत लोगों ने अपनी शहादत दी। इन क्रान्तिकारियों की शहादत गुमनाम रही और भारत के स्वतंत्र होने के बाद उनके योगदान को भुला दिया गया।

ऐसे ही क्रान्तिकारियों में से एक थीं तारा रानी श्रीवास्तव।

तारा रानी श्रीवास्तव का जन्म बिहार की राजधानी पटना के नजदीक सारण जिले में हुआ था। उनके बारे में कहा जाता है कि उन्हें तिरंगा बेहद प्रिय था और वह इसके लिए जान भी दे सकतीं थीं।

महात्मा गांधी के आह्वान पर उन्होंने अपने पति फुलेन्दु बाबू के साथ भारत छोड़ो आंदोलन में हिस्सा लिया।

इस आंदोलन के दौरान नव-विवाहित तारा रानी अपने पति के साथ सीवान थाना की छत पर तिरंगा फहराने के लिए एक भारी भीड़ की अगुवाई कर रहीं थीं। भारी हंगामे के बीच पुलिस ने गोलियां चला दी। तारा रानी के पति फुलेन्दु बाबू पुलिस की गोलियां लगने पर घायल हो गए।



इसके बावजूद तारा रानी दृढ़ रहीं। वह अपने साथियों के साथ पुलिस थाने पहुंचीं और वहां जाकर तिरंगा लहराया।

जब वह वहां से लौटीं, तब तक उनके पति की मौत हो चुकी थी।


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