Advertisement

अब चीन सीमा पर सडक, रेल पटरियों का जाल बिछाएगा भारत

12:51 pm 11 Sep, 2017

Advertisement

डोकलाम विवाद फिलहाल भले ही थम गया हो, लेकिन चीन दोबारा ऐसी कोई हरकत नही करेगा, इस बात की गारंटी नहीं है। इसलिए भारत ने इस विवाद के बाद जहां एक तरफ चीन सीमा से लगे इलाकों में सड़क परियोजनाओं को गति दी है, वहीं अब रेल का जाल बिछाने के लिए भी सर्वे तेज कर दिए हैं। चीन तेजी से सीमा के नजदीक सड़कों और रेल का जाल बिछा रहा है, जिसके जवाब में अब भारत भी उसे काउंटर करने के लिए सीमा पर इन्फ्रस्ट्रक्चर डेवलप करने पर फोकस कर रहा है।


Advertisement

चीन सीमा से सटे इलाकों में रणनीतिक लिहाज से 4 महत्वपूर्ण रेलवे लाइन्स की योजना को अमलीजामा पहनाने की तैयारी चल रही है। इन चारों लाइनों पर सर्वे के लिए सरकार ने 345 करोड़ रुपए का आवंटन किया है जिनमें से रक्षा मंत्रालय की तरफ से 87 करोड़ रुपए 2016-17 के लिए जारी किए जा चुके हैं। रेल राज्यमंत्री राजेन गोहन ने पिछले साल संसद में एक सवाल के लिखित जवाब में यह जानकारी दी थी। जिन चार स्ट्रैटिजिक रेलवे लाइन्स की तैयारी चल रही है, उनमें से एक वेस्टर्न फ्रंट पर बल्कि 3 ईस्टर्न फ्रंट पर है।

सीमा पर रेल नेटवर्क के मामले में चीन को अहम रणनीतिक बढ़त हासिल है।

चीन ने भारत की सीमा के नजदीक 2 बड़े रेलवे लाइन को चालू कर दिया है, जबकि 2 पर अभी काम कर रहा है। गोलमुड से ल्हासा तक 1,142 किलोमीटर लंबी लाइन जुलाई 2006 में ही शुरू हो गई। इसी तरह ल्हासा से शिगात्से तक 253 किलोमीटर लंबी लाइन भी अगस्त 2014 से ही ऑपरेशनल है। ल्हासा से निगत्री तक 433 किलोमीटर और शिगात्से से ड्रोमो तक रेलवे लाइन पर काम चल रहा है। यानी चीन पड़ोसी देश पर कब्ज़े के लिए पहले उसके आसपास के आधारभूत ढांचे को मज़बूत बनाता है।

Advertisement

आपके विचार


  • Advertisement