फिर जाग उठा है भारत का इकलौता ‘जिन्दा’ ज्वालामुखी

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Updated on 18 Feb, 2017 at 1:05 pm

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भारत का इकलौता जिन्दा ज्यालामुखी एक बार फिर से सक्रिय हो गया है। इसमें से राख और लावा निकल रहा है। करीब डेढ सौ साल तक शांत रहने के बाद ये ज्वालामुखी 1991 में सक्रिय हुआ था। इसके बाद लगातार कई गतिविधियां दर्ज की जाती रही हैं।

अंडमान और निकोबार का बैरन द्वीप ज्वालामुखी राजधानी पोर्ट ब्लेयर से 140 किलोमीटर दूर उत्तर-पूर्व में स्थित है।

ज्वालामुखी के एक बार फिर से सक्रिय होने के बारे में वैज्ञानिकों को तब पता चला, जब वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद् (CSIR) और राष्ट्रीय समुद्र विज्ञान संस्था के वैज्ञानिकों का दल इस ज्वालामुखी के पास समुद्र तल से सैंपल लेने के लिए पहुंचा। इसी दौरान उन्होंने देखा कि ज्वालामुखी से ऊपर की ओर धुंआ आ रहा था।

ज्वालामुखी में से दिन के समय में राख निकलती देखी गई वहीं सूरज के डूबने के साथ ही लावा भी निकलना शुरू हो गया। इस घटना के ठीक तीन बाद वैज्ञानिकों का एक और दल इस ज्वालामुखी की स्थिति को देखना पहुंचा। इस बार भी वही नजारा था।

वैज्ञानिकों ने ज्वालामुखी के पास से सैंपल इकट्ठा किए हैं, जो इस ज्वालामुखी के इतिहास की जड़ों को और विस्तार से खोलने में सहायक हो सकते हैं।

जहां तक बात है इस ज्वालामुखी से होने वाली जान-माल की हानि की, तो इस बैरन द्वीप में कोई आबादी नहीं रहती है। यह जगह भूगर्भीय गतिविधियों के लिए जानी जाती है। इस क्षेत्र में समुद्र की गहराइयों में कई और ज्वालामुखी मौजूद है। आपको बता दें कि अगर कोई इस बैरन द्वीप का दौरा करना चाहता है तो उससे सबसे पहले अंडमान-निकोबार के वन विभाग से खास इजाजत लेनी होती है।


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