अंग्रेजी हुकूमत की लाठी के आगे नहीं झुके तिरुपुर कुमारन; अपनी आखिरी सांस तक डटे रहे

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Updated on 12 Aug, 2016 at 1:46 pm

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भारत को अंग्रेजों से स्वतंत्र कराने की जंग में कइयों ने अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। किसी का लहू बहा तो कोई सालों तक जेल में बंद रहा। अंग्रेजों की यातनाएं सही, लेकिन देश के वे वीर जांबाज पीछे नहीं हटे और अपनी अंतिम सांस तक देश की आजादी के लिए लड़ते रहे।

इन्ही जांबाजों में से एक नाम है तिरुपुर कुमारन, एक ऐसा नाम जो अंग्रेजी हुकूमत की लाठी के आगे नहीं टूटा और सीना फख्र से चौड़ा कर अपने देश को स्वंतंत्र कराने की लड़ाई में कूद पड़ा।


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कुमारन ने स्वतंत्रता आंदोलन में भाग ले अपना संपूर्ण जीवन भारत को आजाद कराने में लगा दिया, इसके बावजूद भारत के इस महान स्वतंत्रता सेनानी का नाम इतिहास के पन्नों में कहीं गुम हो गया।

कुमारन ने यह जानते हुए कि उस समय ब्रिटिश सरकार के भारत में तिरंगा के फहराने पर पूरी तरह से मनाही है, राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे को लहराने पर जोर दिया था।

वह तिरुपुर के रहने वाले थे और तिरुपुर में एक शांतिपूर्ण असहयोग आन्दोलन के दौरान ब्रिटिश पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज में वह गंभीर रूप से घायल हो गए। इसी आंदोलन में घायल हुए कुमारन ने अपना दम तोड़ दिया।

अपने वतन की आजादी के लिए इस शख्स ने अंग्रेजों की कई लाठियां खाई, लेकिन अपनी मातृभूमि को आजाद कराने के उद्देश्य पर वह दृढ़ हो डटे रहे।

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