आधुनिक भारतीय चित्रकला के नायक हैं अवनींद्रनाथ टैगोर, स्वदेशी मूल्यों पर दिया जोर

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Updated on 5 Jan, 2017 at 2:46 pm

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भारतीय कला में स्वदेशी मूल्यों को जिसने अपरम्पार ऊंचाइयों तक पहुंचाने में अपना अभिन्न योगदान दिया, वह थे अवनींद्रनाथ टैगोर। ‘अबन ठाकुर’ के नाम से प्रसिद्ध अवनींद्रनाथ टैगोर एक चित्रकार होने के साथ ही बांग्ला बाल साहित्य के प्रख्यात लेखक थे।

टैगोर परिवार में कोलकता के जोरासंको में 7 अगस्त 1871 में जन्मे अवनींद्रनाथ टैगोर ने ‘बंगाल स्कूल ऑफ  आर्ट’ की स्थापना में प्रभावशाली भूमिका निभाई। इससे आधुनिक भारतीय चित्रकारी के एक नए स्वरूप का विकास हुआ।

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अबनिन्द्रनाथ टैगोर blogspot

कोलकाता के संस्कृति कॉलेज में अध्ययन के दौरान ही अवनींद्रनाथ ने चित्रकारी सीखी। सन 1897 में उन्होंने कोलकाता के गवर्नमेंट स्कूल ऑफ़ आर्ट के उप-प्रधानाचार्य और इतालवी चित्रकार सिग्नोर गिल्हार्दी से चित्रकारी के गुण सीखे।

उन्होंने पश्चिम की भौतिकतावादी कला को छोड़ भारत की परंपरागत कलाओं को अपनाने पर जोर दिया। अवनींद्रनाथ टैगोर ने राजपूत और मुग़ल चित्रकारी में आधुनिकता की ऐसी छाप छोड़ी कि भारतीय शैली की कला को एक अलौकिक दर्जा मिला।

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अवनींद्रनाथ टैगोर की चित्रकारी totallyhistory


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कई कलाओं में निपुण अवनींद्रनाथ की कला इतनी सफल हुई कि ‘ब्रिटिश कला संस्थानों’ में उसे ‘राष्ट्रवादी भारतीय कला’ के नाम से प्रोत्साहित किया गया। साहित्य के नोबेल पुरस्कार से नवाजे जाने वाले महान साहित्यकार रवींद्रनाथ टैगोर के भतीजे अवनींद्रनाथ टैगोर को कला की विरासत अपने परिवार से ही मिली। उनके दादा और बड़े भाई गगनेन्द्रनाथ टैगोर भी चित्रकार थे।

बंगला भाषा में बाल-साहित्य का सृजन करने वाले अबनिन्द्रनाथ की प्रमुख कहानियों में से क्षिरेर पुतुल, बुरो अंगला, राज कहानी और शकुंतला है। उन्होंने कला दर्शन और सिद्धांत पर कई लेख लिखे, जिससे उन्हें कलाकारों और विद्वानों से प्रशंसा मिली। कई देशों में उनके चित्रों की प्रदर्शनी भी हुई।

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अवनींद्रनाथ टैगोर द्वारा बनाई गई एक पेंटिंग totallyhistory

वर्ष 1951 में अवनींद्रनाथ टैगोर के निधन के बाद उनके सभी चित्रों को ‘रवीन्द्र भारती सोसाइटी ट्रस्ट’ को दे दिया गया। इस प्रकार यह सोसाइटी उनके द्वारा बनाए गए चित्रों की बड़ी संख्या की संग्रहक बन गई।

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